RAHUL का VOTE घोटाला EXPOSED
आज हम बात करेंगे उस मुद्दे पर, जिसने देश की राजनीति में भूचाल मचा दिया है। यह है—राहुल गांधी और चुनाव आयोग के बीच की बड़ी टक्कर।
एक तरफ हैं कांग्रेस के नेता राहुल गांधी, जो ‘वोट चोरी’ नहीं बल्कि ‘वोट डकैती’ का आरोप लगा रहे हैं। और दूसरी तरफ है देश का सबसे बड़ा चुनावी संस्थान—Election Commission of India—जो इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बता रहा है। तो आखिर सच क्या है? आइए जानते हैं।"
7 अगस्त को राहुल गांधी मीडिया के सामने एक बिल्कुल अलग अंदाज़ में आए। उनका कहना था कि वे एक "एटम बम" फोड़ने वाले हैं। और सचमुच, उन्होंने जो डेटा पेश किया, उसने देश के लोकतंत्र को हिला दिया।
राहुल गांधी का दावा था कि उनकी टीम ने 6 महीने लगाकर कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट की जांच की। और इस जांच में पाँच बड़ी गड़बड़ियां सामने आईं—
1️⃣ डुप्लीकेट वोटर्स – एक ही व्यक्ति का नाम अलग-अलग बूथ या यहां तक कि अलग राज्यों में भी दर्ज।
2️⃣ फर्जी और अमान्य पते – ‘हाउस नं. 0’ जैसे पते, जहां कोई मतदाता मिला ही नहीं।
3️⃣ एक पते पर दर्ज सैकड़ों वोटर – छोटे से घर में 50-80 लोगों का नाम वोटर लिस्ट में।
4️⃣ अमान्य फोटो – हजारों मतदाताओं की फोटो या तो गायब या इतनी धुंधली कि पहचानना असंभव।
5️⃣ फॉर्म-6 का दुरुपयोग – जो फॉर्म नए मतदाताओं के लिए है, उससे 70-90 साल के बुजुर्गों को "पहली बार वोटर" बना दिया गया।
राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने उन्हें वोटर लिस्ट की इलेक्ट्रॉनिक कॉपी देने से इनकार किया और हजारों पन्नों की हार्ड कॉपी पकड़ा दी—ताकि कोई गंभीर जांच न हो सके।
:"इन आरोपों के 10 दिन बाद, 17 अगस्त को चुनाव आयोग सामने आया और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला।"
चुनाव आयोग ने साफ कहा—राहुल गांधी के सारे आरोप "भ्रामक और निराधार" हैं। आयोग ने राहुल गांधी को चुनौती दी—7 दिन के भीतर अपने दावों पर हलफनामा दें या फिर पूरे देश से माफी मांगें।
ECI ने सफाई दी कि—‘हाउस नं. 0’ उन मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होता है जिनका कोई स्थायी पता नहीं होता। साथ ही, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि गोपनीयता की वजह से इलेक्ट्रॉनिक कॉपी नहीं दी जा सकती।
लेकिन यहाँ दो बड़े सवाल खड़े होते हैं।
पहला—जब बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने भी कई चुनाव क्षेत्रों में वोट चोरी का आरोप लगाया था, तब उनसे कोई हलफनामा क्यों नहीं मांगा गया? क्या ये दोहरा मापदंड नहीं है?
दूसरा—अगर वोटर लिस्ट में वाकई गड़बड़ी है, तो चुनाव आयोग खुद इसकी जांच क्यों नहीं करता? क्या वजह ये है कि आयोग के पास सीमित संसाधन हैं? या फिर वजह कुछ और है, जिसे छुपाया जा रहा है?"
"राहुल गांधी ने कहा कि यह मामला सिर्फ कांग्रेस और चुनाव आयोग का नहीं, बल्कि पूरे देश के लोकतंत्र का है। अगर एक आम नागरिक का वोट ही छिन जाए, तो लोकतंत्र का क्या बचेगा?
अब देखना है—क्या राहुल गांधी हलफनामा देंगे? या चुनाव आयोग अपने रुख में बदलाव करेगा? और सबसे बड़ा सवाल—क्या देश की जनता इस खतरे को महसूस करेगी?
दोस्तों, आप क्या सोचते हैं? क्या राहुल गांधी के आरोप सही हैं, या चुनाव आयोग का पक्ष? अपनी राय हमें कमेंट में ज़रूर बताइए।"