मध्यप्रदेश में मोहन सरकार का बड़ा फैसला

मध्यप्रदेश की सियासत से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। …
मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार…प्रदेश में जल्द ही नगरी निकाय में…. अध्यक्ष पद को लेकर बड़ा फैसला कर सकती है।… दरअसल इस बात की सुगबुगाहट तेज हो गई है कि… अब नगर निकाय के जो अध्यक्ष होते हैं… उनके चुनाव भी प्रत्यक्ष प्रणाली से कराए जाए…वर्तमान में मध्यप्रदेश में महापौर का चुनाव तो…. प्रत्यक्ष प्रणाली से होता है, …यानी जनता सीधे वोट देकर महापौर चुनती है।… लेकिन नगरीय निकायों के अध्यक्षों का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से होता है।…. इसका मतलब है कि चुने हुए पार्षद ….मिलकर तय करते हैं कि… अध्यक्ष कौन होगा।… जिस दल के पास ज्यादा पार्षद होते हैं…, वही दल अपने नेता को अध्यक्ष चुन लेता है।… यह व्यवस्था साल 2014 में… तत्कालीन शिवराज सिंह चौहान सरकार ने लागू की थी। ….उससे पहले मध्यप्रदेश में अध्यक्षों का चुनाव भी ..महापौर की तरह प्रत्यक्ष प्रणाली से होता था।... 2014 में शिवराज सरकार ने... इस व्यवस्था को बदलकर अप्रत्यक्ष प्रणाली लागू की थी ….लेकिन अब मोहन यादव सरकार इस फैसले को पलटने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।... सूत्रों के मुताबिक, मोहन यादव सरकार और ...उनके कैबिनेट सहयोगी इस अप्रत्यक्ष प्रणाली से ...होने वाली समस्याओं को लेकर चिंतित हैं।... सबसे बड़ी समस्या है ...धनबल का बढ़ता प्रभाव।.... माना जाता है कि अप्रत्यक्ष प्रणाली में... अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल लोग ...धनबल का खुलकर इस्तेमाल करते हैं।... इसके अलावा, इस प्रणाली में बड़े नेताओं पर भी.. अनावश्यक दबाव बनता है ...कि वे किस उम्मीदवार का समर्थन करें। ...इससे सियासी तनाव और ...विवाद की स्थिति भी पैदा होती है....मोहन यादव सरकार अब इस प्रथा को खत्म करना चाहती है।... खबर है कि सरकार चाहती है कि... नगरीय निकायों के अध्यक्षों का चुनाव भी जनता सीधे वोट देकर करे..., जैसा कि महापौर के चुनाव में होता है।... इससे न केवल धनबल पर लगाम लगेगी,.... बल्कि जनता की भागीदारी भी बढ़ेगी और पारदर्शिता आएगी। ...आपको बता दें कि इस मुद्दे पर पहले भी चर्चा हो चुकी है।... साल 2018-2020 में ....कमलनाथ सरकार के 15 महीने के कार्यकाल में भी... इस दिशा में काम शुरू हुआ था।.... कमलनाथ ने भी अध्यक्षों के चुनाव को... प्रत्यक्ष प्रणाली से कराने की बात कही थी,... लेकिन उनकी सरकार जाने के बाद ...यह मुद्दा ठंडे बस्ते में चला गया....अब मोहन यादव सरकार के मंत्रियों ने.... इस मुद्दे को फिर से उठाया है।... कैबिनेट में कई मंत्रियों ने मुख्यमंत्री से कहा है कि... अप्रत्यक्ष प्रणाली से नुकसान ज्यादा हो रहे हैं।... धनबल के साथ-साथ यह प्रणाली बड़े नेताओं के लिए भी मुश्किलें खड़ी करती है।.... इसलिए, माना जा रहा है कि... जल्द ही मध्यप्रदेश में नगरीय निकायों के अध्यक्षों के चुनाव को... फिर से प्रत्यक्ष प्रणाली से कराने का फैसला लिया जा सकता है।... अगर ऐसा हुआ, तो यह शिवराज सरकार के ...2014 के फैसले को पलटने वाला एक बड़ा कदम होगा...., मोहन यादव सरकार का यह कदम... न केवल नगरीय निकायों में पारदर्शिता लाने की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है,... बल्कि यह सियासी समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।.