ग्वालियर में अंबेडकर मूर्ति महासंग्राम वकील Vs भीम आर्मी
ग्वालियर की सड़कों पर आखिर ऐसा तनाव क्यों है?... कैसे सिर्फ एक डॉ. अंबेडकर की एक मूर्ति...., पूरे शहर को छावनी में बदल सकती है? ...जो विवाद अदालत में शुरू हुआ,... वो सड़कों पर संग्राम कैसे बन गया? ...आइए समझते हैं
नमस्कार...मैं हूँ पुष्पाजंली पाण्डेय और आप देख रहे है....सूरमा भोपाली आज हम बात कर रहे हैं.... ग्वालियर की उस घटना की, ...जिसने पूरे शहर में हंगामा खड़ा कर दिया.... ये कहानी सिर्फ एक मूर्ति की नहीं..., बल्कि सामाजिक सम्मान, कानूनी दांव-पेंच और सियासत की है..... ग्वालियर हाईकोर्ट में डॉ. अंबेडकर की मूर्ति लगाने का विवाद... इतना फैला कि शहर में धारा 144 लगानी पड़ी ...और भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा.... तो आखिर एक सम्मानजनक इरादा..., एक विस्फोटक टकराव में कैसे बदल गया?...विवाद की नींव फरवरी 2025 में पड़ी,... जब कुछ वकीलों ने हाईकोर्ट परिसर में ...डॉ. अंबेडकर की मूर्ति लगाने की मांग की..... चीफ जस्टिस की मौखिक सहमति के बाद मूर्ति के लिए... फाउंडेशन का काम शुरू हुआ और.... वकीलों ने चंदा इकट्ठा कर 10 फीट ऊंची प्रतिमा बनवाई.... लेकिन ग्वालियर बार एसोसिएशन के एक गुट ने यह कहकर आपत्ति जताई कि... इसके लिए कोई लिखित इजाजत नहीं ली गई,.... जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है.... 10 मई को जब मूर्ति स्थापना की तैयारी थी..., तो विरोधी गुट के वकीलों ने उसी फाउंडेशन पर तिरंगा फहरा दिया,... जिससे वकीलों के दो गुट आमने-सामने आ गए....और कोर्ट की ये लड़ाई जल्द ही सड़कों पर आ गई.... जैसे ही मूर्ति के विरोध की खबर फैली,.... भीम आर्मी और कई दूसरे दलित-बहुजन संगठन... इस लड़ाई में कूद पड़े..... उनके लिए यह बाबासाहेब के सम्मान पर हमले जैसा था..... शहर में प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया.... मामला तब और बिगड़ गया जब हाईकोर्ट के बाहर भीम आर्मी कार्यकर्ताओं.... और वकीलों के बीच झड़प हो गई.... अब ये लड़ाई एक सीधा सामाजिक और जातीय टकराव बन चुकी थी....बिगड़ते हालात देखकर प्रशासन को मैदान में उतरना पड़ा...और ग्वालियर का हाईकोर्ट इलाका पुलिस छावनी में तब्दील हो गया..... शांति बनाए रखने के लिए 1000 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए गए और... पूरे इलाके में धारा 144 लगा दी गई.... प्रशासन ने किसी भी रैली या सभा की इजाजत नहीं दी.... इतना ही नहीं, बनकर तैयार 10 फीट ऊंची मूर्ति को मूर्तिकार के स्टूडियो में ही... पुलिस की कड़ी निगरानी में रख दिया गया... ताकि उसे कोई नुकसान न पहुंचे....इस विवाद में दो पक्ष हैं.... मूर्ति समर्थक, जिनमें दलित संगठन और कांग्रेस शामिल हैं,.... इसे संविधान निर्माता का सम्मान मानते हैं.... उनका सवाल है कि जब दूसरे हाईकोर्ट में अंबेडकर की मूर्ति लग सकती है.... तो ग्वालियर में क्यों नहीं?... वहीं, विरोधी पक्ष का कहना है कि वे अंबेडकर के खिलाफ नहीं,... बल्कि प्रक्रिया के उल्लंघन के खिलाफ हैं.... उनका तर्क है कि कोई भी काम कायदे और कानून से होना चाहिए... और मूर्ति के लिए तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया...
इस विवाद ने ग्वालियर के सामाजिक माहौल में तनाव घोल दिया है.....जिसके बाद मामला अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से निकलकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है..... फिलहाल, ग्वालियर में शांति है, लेकिन तनाव बना हुआ है.... डॉ. अंबेडकर की वो मूर्ति आज भी पुलिस सुरक्षा में है... और सभी पक्ष अदालत के अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे हैं.... यह मामला दिखाता है कि कैसे प्रतीकों की राजनीति... जमीन पर एक गंभीर टकराव की वजह बन सकती है.....
तो ग्वालियर का ये विवाद सम्मान और नियमों के टकराव की कहानी है..... इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है?.... आपको क्या लगता है, इस तरह के विवादों का स्थायी समाधान क्या हो सकता है?... अपनी राय हमें कमेंट्स में जरूर बताइएगा....और अगर आपको ये एनालिसिस पसंद आया, हो...तो हमारे चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें....