मध्य प्रदेश BJP के 10 सबसे पावरफुल नेता
MP BJP के 11 सबसे शक्तिशाली नेता 2025
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मध्य प्रदेश की राजनीति एक बेहद दिलचस्प मोड़ पर है। शिवराज सिंह चौहान के लगभग दो दशकों के राज के बाद, सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल चुका है। नए मुख्यमंत्री, नई टीम और नई चुनौतियाँ। तो सवाल ये है कि इस नए दौर में, साल 2025 में, मध्य प्रदेश बीजेपी के वो 11 सबसे ताकतवर चेहरे कौन हैं, जिनके इशारों पर प्रदेश की सियासत चल रही है? किसकी ताकत बढ़ी है, और किसका कद घटा है?
आज हम आपके सामने वो लिस्ट रखेंगे जो मध्य प्रदेश का भविष्य तय कर रही है। यकीन मानिए, इस लिस्ट में कुछ नाम आपको चौंका भी सकते हैं। तो बने रहिए हमारे साथ, क्योंकि हम शुरू करने जा रहे हैं मध्य प्रदेश बीजेपी के 11 सबसे शक्तिशाली नेताओं की उलटी गिनती।
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**नंबर 11: प्रहलाद सिंह पटेल**
हमारी लिस्ट में ग्यारहवें नंबर पर हैं बीजेपी के एक और दिग्गज नेता, प्रहलाद सिंह पटेल। 2023 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले, वो केंद्र में एक ताकतवर मंत्री थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें वापस राज्य की राजनीति में भेज दिया। आज वो मोहन यादव कैबिनेट में एक सीनियर मंत्री हैं। पटेल की गिनती बीजेपी के फायरब्रांड नेताओं में होती है और महाकौशल इलाके में उनका जबरदस्त प्रभाव है। वो अपनी मज़बूत प्रशासनिक पकड़ और मुखर अंदाज़ के लिए जाने जाते हैं। केंद्र से राज्य में उनकी वापसी को पार्टी की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना गया था। उनका केंद्रीय अनुभव और राज्य के प्रशासनिक ढांचे में उनकी सीधी भूमिका उन्हें एक ऐसा नेता बनाती है, जिसे कोई भी नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता।
**नंबर 10: जगदीश देवड़ा**
हमारी लिस्ट में दसवें नंबर पर हैं मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री, जगदीश देवड़ा। मंदसौर के मल्हारगढ़ से लगातार 6 बार के विधायक, देवड़ा पार्टी के सबसे भरोसेमंद दलित चेहरों में से एक हैं। पिछली शिवराज सरकार में वो वित्त मंत्री जैसे अहम पद पर थे, जो सरकार में उनके अनुभव और भरोसे को दिखाता है। उनका लंबा विधायी अनुभव और मालवा क्षेत्र में उनकी गहरी पकड़ सरकार को स्थिरता देती है। मुख्यमंत्री मोहन यादव और उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला के साथ उनकी तिकड़ी, 2025 में मध्य प्रदेश सरकार की रीढ़ है। उनका शांत स्वभाव और ज़मीनी पकड़ ही उनकी असली ताकत है, जो उन्हें सत्ता के गलियारों में एक पावरफुल व्यक्ति बनाती है।
**नंबर 9: राजेंद्र शुक्ला**
अब बात करते हैं मध्य प्रदेश सरकार के एक मज़बूत स्तंभ की। नंबर 9 पर हैं उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला। विंध्य क्षेत्र में राजेंद्र शुक्ला बीजेपी का एक निर्विवाद ब्राह्मण चेहरा बनकर उभरे हैं। रीवा से पांच बार के विधायक, शुक्ला अपनी विनम्र शैली और विकास पर फोकस के लिए जाने जाते हैं। शिवराज सरकार में भी वो मंत्री रह चुके हैं और उनके पास स्वास्थ्य से लेकर उद्योग जैसे अहम विभागों का लंबा अनुभव है। कहते हैं कि रीवा में एयरपोर्ट और भारत का सबसे बड़ा सोलर पावर प्लांट लाने का श्रेय उन्हीं को जाता है। 2023 के चुनाव में बीजेपी ने विंध्य की 30 में से 25 सीटें जीतीं, और इस शानदार प्रदर्शन ने पार्टी में उनका कद और भी ऊंचा कर दिया। सरकार के नीतिगत फैसलों और विंध्य क्षेत्र पर उनकी पकड़, उन्हें इस लिस्ट में एक शक्तिशाली जगह दिलाती है।
**नंबर 8: वी.डी. शर्मा**
आठवें नंबर पर वो नेता हैं जिन्होंने प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर बीजेपी को एक लंबा और सफल कार्यकाल दिया - वी.डी. शर्मा। खजुराहो से सांसद, शर्मा ने लगभग साढ़े पांच साल तक प्रदेश अध्यक्ष का पद संभाला, जो कि एक रिकॉर्ड है। उनके नेतृत्व में पार्टी ने कई चुनावी सफलताएं हासिल कीं। एक मजबूत संगठनकर्ता के तौर पर उनकी छवि और RSS की पृष्ठभूमि उन्हें पार्टी के भीतर एक अहम स्थान दिलाती है। भले ही अब वो प्रदेश अध्यक्ष नहीं हैं, लेकिन सांसद के तौर पर और दिल्ली में उनकी मौजूदगी उन्हें एक प्रभावशाली नेता बनाए रखती है। माना जा रहा है कि पार्टी जल्द ही उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर कोई नई जिम्मेदारी सौंप सकती है।
**नंबर 7: कैलाश विजयवर्गीय**
अब बात करते हैं एक ऐसे नेता की, जो अपनी आक्रामक राजनीति और संगठन पर मज़बूत पकड़ के लिए जाने जाते हैं। नंबर सात पर हैं, बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री, कैलाश विजयवर्गीय। विजयवर्गीय दशकों से एमपी की राजनीति के एक मुख्य किरदार रहे हैं। इंदौर के मेयर से लेकर 6 बार विधायक और राज्य सरकार में 12 साल तक कैबिनेट मंत्री रहे हैं। हरियाणा और फिर पश्चिम बंगाल में पार्टी प्रभारी के तौर पर उनके काम ने राष्ट्रीय स्तर पर उनका कद बहुत बड़ा कर दिया। उनकी यही राष्ट्रीय छवि और अमित शाह जैसे शीर्ष नेताओं से करीबी उन्हें बेहद शक्तिशाली बनाती है। 2025 में, वो सरकार में एक सीनियर मंत्री होने के साथ-साथ संगठन के एक ऐसे पावर सेंटर हैं, जिनका असर मालवा-निमाड़ से लेकर दिल्ली तक महसूस किया जाता है।
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हम अपनी लिस्ट के आधे पड़ाव पर आ चुके हैं। जैसा कि आप देख रहे हैं, मध्य प्रदेश में शक्ति के कई केंद्र हैं और हर नेता की अपनी एक अलग ताकत है। आपको क्या लगता है? क्या ये लिस्ट अब तक सही है? आपकी नज़र में कौन सा नेता और ज़्यादा शक्तिशाली है? नीचे कमेंट्स में हमें ज़रूर बताइए। और अगर आप मध्य प्रदेश की राजनीति पर ऐसे ही डीप एनालिसिस वाले वीडियो और देखना चाहते हैं, तो हमारे चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें।
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चलिए, अब बढ़ते हैं अपनी लिस्ट के टॉप 6 की ओर। ये वो नेता हैं जो न सिर्फ सरकार और संगठन, बल्कि पूरे प्रदेश की राजनीति पर सीधा असर डालते हैं।
**नंबर 6: नरेंद्र सिंह तोमर**
नंबर 6 पर हैं मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष, नरेंद्र सिंह तोमर। तोमर का कद कितना बड़ा है, इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाइए कि वो मोदी कैबिनेट में कृषि मंत्री जैसा अहम पद छोड़कर राज्य की राजनीति में लौटे हैं। वो बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं और उनका सांगठनिक अनुभव बहुत गहरा है। विधानसभा अध्यक्ष के तौर पर वो सदन के कामकाज को कंट्रोल करते हैं, जो अपने आप में एक बेहद शक्तिशाली पद है। लेकिन उनकी असली ताकत सदन के बाहर भी दिखती है। ग्वालियर-चंबल संभाग में उनका प्रभाव निर्विवाद है। मुख्यमंत्री मोहन यादव और यहां तक कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी उनके स्पीकर बनने का प्रस्ताव रखा था, जो पार्टी के भीतर उनके सम्मान को दिखाता है।
**नंबर 5: शिवराज सिंह चौहान**
पांचवें नंबर पर वो नाम है, जिसके बिना मध्य प्रदेश की राजनीति की कल्पना नहीं की जा सकती - पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान। लगभग 18 साल तक प्रदेश के सीएम रहने के बाद, आज भी उनकी लोकप्रियता और ज़मीनी पकड़ बेजोड़ है। 'मामा' के तौर पर उनकी छवि आज भी लोगों के दिलों में है। फिलहाल वो केंद्र सरकार में कृषि और ग्रामीण विकास जैसे भारी-भरकम मंत्रालय के कैबिनेट मंत्री हैं। यह भूमिका उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी ताकत देती है, जिसका फायदा मध्य प्रदेश को भी मिलता है। 'लाडली बहना' जैसी योजनाओं की वजह से उनका एक समर्पित महिला वोटर बेस है। वो सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि एक संस्था बन चुके हैं। भले ही वो आज सीएम न हों, लेकिन दिल्ली में उनकी मज़बूत स्थिति और मध्य प्रदेश से उनका भावनात्मक जुड़ाव उन्हें 2025 में भी बीजेपी के सबसे शक्तिशाली नेताओं में से एक बनाता है।
**नंबर 4: हितानंद शर्मा**
लिस्ट में नंबर चार पर एक ऐसा नाम है जो पर्दे के पीछे रहकर असली ताकत रखता है - हितानंद शर्मा। हितानंद शर्मा, बीजेपी के प्रदेश संगठन महामंत्री हैं। यह पद सरकार और संघ के बीच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है। RSS की पृष्ठभूमि से आने वाले शर्मा की संगठन पर गहरी पकड़ है। पर्दे के पीछे रहकर रणनीति बनाना और उसे लागू करवाना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। कहा जाता है कि पार्टी के छोटे से छोटे फैसले से लेकर बड़ी रणनीतियों तक, उनकी राय बेहद अहम होती है। मुख्यमंत्री से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक, सभी के साथ उनका सीधा तालमेल उन्हें 2025 में एमपी बीजेपी के सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में से एक बनाता है।
**नंबर 3: हेमंत खंडेलवाल**
हमारी लिस्ट में नंबर 3 पर एक ऐसा नाम है जिसके हाथों में 2025 में संगठन की असली कमान है - हेमंत खंडेलवाल। जुलाई 2025 में उन्हें निर्विरोध मध्य प्रदेश भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष चुना गया। खंडेलवाल बैतूल से विधायक हैं और उनका परिवार दशकों से भाजपा और संघ से जुड़ा रहा है। उनके पिता, विजय खंडेलवाल, बैतूल से चार बार सांसद रहे। हेमंत खुद लो-प्रोफाइल रहकर काम करने के लिए जाने जाते हैं, लेकिन उनका सांगठनिक कौशल बेजोड़ है। मुख्यमंत्री और संगठन के बीच तालमेल बैठाने की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी अब इन्हीं के कंधों पर है, जो इन्हें 2025 के सबसे अहम खिलाड़ियों में से एक बनाती है।
**नंबर 2: ज्योतिरादित्य सिंधिया**
इस लिस्ट में दूसरे स्थान पर वो नाम है, जिसने मध्य प्रदेश की राजनीति की दिशा ही बदल दी - ज्योतिरादित्य सिंधिया। 2020 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आने के बाद से सिंधिया लगातार ताकतवर बने हुए हैं। केंद्र सरकार में एक अहम कैबिनेट मंत्री के तौर पर, दिल्ली की सत्ता के केंद्र में उनकी सीधी पहुंच है। मध्य प्रदेश सरकार में उनके समर्थक विधायकों की अच्छी-खासी संख्या है, जो उन्हें राज्य की राजनीति में एक पावरफुल 'रिमोट कंट्रोल' देती है। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र पर उनका असर आज भी कायम है। 2025 में, वो केंद्र और राज्य के बीच एक मज़बूत पुल की तरह हैं और उनकी हां या ना, सरकार के कई फैसलों को प्रभावित कर सकती है।
**नंबर 1: मोहन यादव**
और अब, नंबर एक पर हैं मध्य प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री, डॉक्टर मोहन यादव। दिसंबर 2023 में जब बीजेपी ने उन्हें सीएम चुना, तो हर कोई हैरान रह गया। लेकिन अपने अब तक के कार्यकाल में उन्होंने साबित कर दिया है कि वो एक दमदार और प्रभावी प्रशासक हैं। उज्जैन से तीन बार के विधायक, यादव के पास सरकार और संगठन दोनों का अनुभव है। उन्होंने बहुत तेज़ी से शासन पर अपनी पकड़ बनाई है। सबसे ज़रूरी बात यह है कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय नेतृत्व का पूरा समर्थन हासिल है, जो उनकी शक्ति का सबसे बड़ा सोर्स है। मुख्यमंत्री होने के नाते राज्य की पूरी प्रशासनिक मशीनरी उनके कंट्रोल में है। 2025 में, वो बिना किसी शक के सत्ता के शिखर पर हैं और प्रदेश का हर बड़ा फैसला उनकी सहमति से ही लिया जाता है, जो उन्हें मध्य प्रदेश का सबसे शक्तिशाली नेता बनाता है।
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तो यह थी हमारी लिस्ट मध्य प्रदेश बीजेपी के 11 सबसे शक्तिशाली नेताओं की। यह साफ है कि 2025 में एमपी की राजनीति एक नए दौर में है, जिसका नेतृत्व मुख्यमंत्री मोहन यादव कर रहे हैं। उनके साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया, शिवराज सिंह चौहान और संगठन में हितानंद शर्मा और हेमंत खंडेलवाल जैसे नेता शक्ति का संतुलन बनाए हुए हैं।