जयपुर के SMS हॉस्पिटल में लगी भीषण आग
जयपुर के SMS हॉस्पिटल के ICU में लगी आग ने... 8 लोगों की ज़िंदगियाँ निगल लीं... 8 मरीज… जो ठीक होने आए थे, ...लेकिन ज़िंदा लौट नहीं पाए।...सवाल ये नहीं कि आग क्यों लगी… सवाल ये है कि...क्या ये हादसा रोका जा सकता था?...क्या हम सिस्टम की लापरवाही का फिर शिकार हुए हैं?....चलिए, आपको पूरी कहानी बताते हैं... जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में… रविवार देर रात आग लग गई। हादसे में 8 मरीजों की मौत हो गई। इनमें 3 महिलाएं शामिल हैं।…रात 11 बजकर 20 मिनट पर यह आग ट्रॉमा सेंटर के… न्यूरो आईसीयू वार्ड के स्टोर में लगी।… यहां पेपर, आईसीयू का सामान और ब्लड सैंपलर ट्यूब रखे थे।…ट्रॉमा सेंटर के नोडल ऑफिसर और सीनियर डॉक्टर ने बताया कि… शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका है।…. हादसे के समय आईसीयू में 11 मरीज थे।… उसके बगल वाले आईसीयू में 13 मरीज थे।..वहीं, इस अग्निकांड की जांच के लिए… शासन स्तर पर 6 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। ….FSL की टीम मौके पर पहुंची और… सबूत इकट्ठे किए।… फायर विभाग के कर्मचारी अवधेश पांडे ने बताया कि... अलार्म बजते ही टीम मौके पर पहुंची।…और पूरे वार्ड में धुआं भर चुका था।... अंदर जाने का कोई रास्ता नहीं था।... ऐसे में बिल्डिंग की दूसरी ओर से ...खिड़की के कांच उतारकर पानी की बौछार मारी गई।..... आग पर काबू पाने में एक से डेढ़ घंटे का समय लगा।... सभी मरीजों को बेड समेत बाहर सड़क पर शिफ्ट किया गया।...मरीज के परिजन बोले- 20 मिनट पहले ही बता दिया था,... किसी ने ध्यान नहीं दिया...भरतपुर के रहने वाले शेरू ने बताया कि... आग भड़कने से 20 मिनट पहले धुआं निकलना शुरू हुआ था।...हमने स्टाफ को बताया,... लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।...
रात 11:20 बजे तक धुआं बढ़ने लगा ...और प्लास्टिक की ट्यूब पिघलकर गिरने लगी।... मौके पर मौजूद वार्ड बॉय वहां से भाग निकले।...शेरू ने बताया कि हमने खुद ही अपने पेशेंट को मुश्किल से बाहर निकाला।... हादसे के दो घंटे बाद पेशेंट को ग्राउंड फ्लोर पर शिफ्ट किया गया।... अब तक यह जानकारी नहीं है कि उनकी क्या स्थिति है।.... हमें मिलने नहीं दिया जा रहा है।...ज्सके बाद अब सियासत भई गर्मा गई है...और विपक्ष इस अग्निकांड को हादसा नहीं हत्या करार दिया है...बता दे की वहादसे के दो घंटे बाद पेशेंट को ग्राउंड फ्लोर पर शिफ्ट किया गया।.... अब तक यह जानकारी नहीं है कि ...उनकी क्या स्थिति है। अब सवाल उठते हैं की..ICU जैसे संवेदनशील क्षेत्र में फायर सेफ्टी अलर्ट क्यों नहीं था?..और अगर धुआं पहले से दिख रहा था ..तो स्टाफ ने प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी?...क्या जानें इतनी सस्ती हैं कि... अस्पताल में बचाव के बेसिक इंतज़ाम भी न हों?..."ये सिर्फ 8 परिवारों की त्रासदी नहीं… ये एक सिस्टम की नाकामी का चेहरा है।..
PUSHPANJALI PANDEY 