पटना यूनिवर्सिटी हॉस्टल बना बम फैक्ट्री
जहाँ देश का भविष्य तैयार होता है,... वहाँ बम बनाने की तैयारी चल रही थी...यह किसी फिल्म की कहानी नहीं..., बल्कि बिहार के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षा केंद्रों में से एक..., पटना यूनिवर्सिटी की हकीकत है... छात्र संघ चुनाव से ठीक पहले, ...यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में आतंक का सामान तैयार हो रहा था...यह कहानी उन छात्रों की है... जिन्होंने कलम की जगह हाथ में बारूद उठा लिया...लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात?... पुलिस की शुरुआती पूछताछ में यह सामने आया कि... इस पूरी साजिश की ट्रेनिंग किसी अपराधी ने नहीं, ...बल्कि यूट्यूब ने दी थी....आखिर ज्ञान के सबसे बड़े केंद्र में आतंक की यह फैक्ट्री कैसे चल रही थी?....और कौन थे वो लोग,... जो इन छात्रों के भविष्य को बारूद के धुएँ में झोंक रहे थे?....एक दिन रात को पटना पुलिस के पास एक सीक्रेट टिप आती है,.... जिसने सबके होश उड़ा दिए.... खबर थी कि पटना यूनिवर्सिटी के अंबेडकर हॉस्टल में ...कुछ छात्र बम बना रहे हैं... सूचना इतनी पक्की थी कि... उसे हल्के में नहीं लिया जा सकता था.... फौरन एक टीम बनाई गई और आधी रात के अंधेरे में ....हॉस्टल को घेर लिया गया....और जब पुलिस हॉस्टल के कमरा नंबर सात पर पहुँची..., तो अंदर का नजारा देखकर दंग रह गई....पुलिस को देखते ही कमरे में मौजूद छात्रों में... भगदड़ मच गई, लेकिन चार लड़कों को धर दबोचा गया...जब कमरे की तलाशी शुरू हुई,... तो वहां से जो मिला, वो किसी स्टूडेंट के कमरे का सामान नहीं, ...बल्कि एक छोटी-मोटी बम फैक्ट्री का जखीरा था.... पुलिस को मौके से सुतली, बारूद, कीलें और कांच के नुकीले टुकड़े मिले... इतना ही नहीं, तलाशी में कई तैयार देसी बम भी बरामद हुए,... जो शायद किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए रखे गए थे... इस खुलासे ने पूरे प्रशासन को हिलाकर रख दिया था...जांच में एक और चौंकाने वाली बात पता चली... जिन कमरों में यह सब चल रहा था,... वे किसी भी छात्र को अलॉट ही नहीं किए गए थे...ये जर्जर और खाली पड़े कमरे थे..., जिन पर कुछ छात्रों ने अवैध कब्जा कर रखा था ...और यहीं से अपनी आपराधिक गतिविधियाँ चला रहे थे... हॉस्टल, जो छात्रों का दूसरा घर होता है,... अब वर्चस्व और सियासत की लड़ाई का अड्डा बन चुका था...जिसपर प्रशासन ने फौरन एक्शन लेते हुए... पूरे हॉस्टल को खाली कराकर सील कर दिया, .....पुलिस ने जब हिरासत में लिए गए छात्रों से सख्ती से पूछताछ की..., तो इस साजिश की परतें खुलने लगीं... छात्रों ने जो दावा किया..., वह आज के डिजिटल युग के एक बड़े खतरे को दिखाता है...उन्होंने बताया कि बम बनाने का तरीका उन्होंने किसी और से नहीं,.... बल्कि यूट्यूब पर मौजूद वीडियो से सीखा था.. यह एक ऐसा खुलासा था जिसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया...छात्रों के मुताबिक,... अगर बम बनाने में कोई भी दिक्कत आती, ....तो वे तुरंत यूट्यूब का वीडियो देखकर अपनी प्रॉब्लम सॉल्व कर लेते थे...यह घटना दिखाती है कि कैसे... इंटरनेट का गलत इस्तेमाल युवाओं को एक खतरनाक रास्ते पर धकेल सकता है... जिन प्लेटफॉर्म्स को जानकारी और मनोरंजन के लिए बनाया गया,.... वे अब अपराध की ट्रेनिंग देने का जरिया बन रहे हैं... पुलिस का कहना है कि वे छात्रों से उन चैनलों के लिंक हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं..., ताकि यूट्यूब को पत्र लिखकर ऐसे खतरनाक कंटेंट को हटाने की मांग की जा सके...लेकिन सवाल यह है कि ...आखिर इन छात्रों को ऐसा करने की ज़रूरत ही क्यों पड़ी? ...वे कौन सी ताकतें थीं जो उन्हें किताबों से दूर और बमों के करीब ले जा रही थीं?... इसका जवाब पटना यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति के उस अंधेरे कोने में छिपा है, ...जहाँ दबदबे की लड़ाई किसी भी हद तक जा सकती है.....पुलिस की जांच में यह बात लगभग साफ हो गई है कि... इस पूरी साजिश का मकसद... छात्र संघ चुनाव में दहशत फैलाकर अपना दबदबा बनाना था... पटना यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव सिर्फ एक चुनाव नहीं होता; ...यह ताकत, पहचान और भविष्य की राजनीति का लॉन्चपैड माना जाता है...यहाँ की हार-जीत कई छात्रों का पॉलिटिकल करियर तय करती है...इसी ताकत को पाने के लिए छात्र गुट किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं..., जिसमें हिंसा और धमकी देना आम हो गया है...गिरफ्तार छात्रों ने कबूल किया कि वे चुनाव के दौरान... बम फोड़कर दूसरे गुटों में डर पैदा करना चाहते थे, ...ताकि वे आसानी से चुनाव जीत सकें...लेकिन इस कहानी में एक और खतरनाक मोड़ है... इस साजिश में सिर्फ मौजूदा छात्र ही शामिल नहीं थे..., बल्कि उनकी मदद कुछ पुराने छात्र भी कर रहे थे... ये वो "सीनियर्स" थे जो यूनिवर्सिटी से तो निकल चुके हैं..., लेकिन कैंपस पर अपनी पकड़ छोड़ना नहीं चाहते...वे नए छात्रों को अपने गुट में शामिल करते हैं..., उन्हें पैसे और पावर का लालच देते हैं,... और फिर अपने सियासी फायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं... बताया जा रहा है कि बम बनाने और उन्हें छिपाने में भी.. इन्हीं पुराने छात्रों ने मदद की थी... पुलिस ने कहा है कि इन लोगों की पहचान कर ली गई है और... उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है... बता दे की पटना यूनिवर्सिटी कैंपस का हिंसा और बमबाजी से पुराना नाता रहा है.... यह घटना कोई पहली बार नहीं हुई है..., बल्कि यह उस सिलसिले की एक और कड़ी है जो सालों से चला आ रहा है... इसी साल मार्च 2025 में, ..छात्र संघ चुनाव से ठीक पहले,... यूनिवर्सिटी के दरभंगा हाउस कैंपस में एक प्रोफेसर की कार पर क्रूड बम फेंका गया था,... जिससे पूरे कैंपस में डर फैल गया था...यह हमला भी छात्र गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई का ही नतीजा था..इससे भी दर्दनाक घटना पटना के बीएन कॉलेज में हुई थी..., जहाँ आपसी रंजिश में फेंके गए एक बम ने ...परीक्षा देकर निकल रहे एक छात्र की जान ले ली थी... सुजीत कुमार नाम का यह छात्र एग्जाम देकर बाहर ही आया था कि... बम सीधे उसके सिर पर जा लगा... इस मामले में भी पुलिस ने कई छात्रों को गिरफ्तार किया और जांच में.. छात्र गुटों की पुरानी दुश्मनी की बात सामने आई...ये घटनाएं चीख-चीख कर बता रही हैं कि... पटना यूनिवर्सिटी और उसके कॉलेजों के हॉस्टल धीरे-धीरे आपराधिक तत्वों की पनाहगाह बनते जा रहे हैं... बार-बार होती बमबाजी की ये घटनाएं सबूत हैं कि... अगर इस समस्या को जड़ से नहीं मिटाया गया,... तो न जाने कितने और बेकसूर छात्रों का भविष्य इस हिंसा की भेंट चढ़ जाएगा...अंबेडकर हॉस्टल से मिले बम और बीएन कॉलेज में एक छात्र की मौत,.. ये घटनाएं एक ही सवाल पूछ रही हैं: ...आखिर शिक्षा के ये मंदिर कब तक हिंसा और सियासत के अखाड़े बने रहेंगे?.... यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं है, ...बल्कि हमारी शिक्षा व्यवस्था और समाज पर भी एक बड़ा सवाल है... जब छात्र किताबों की जगह यूट्यूब से बम बनाना सीखने का दावा करने लगें,.... तो हमें सोचना होगा कि हम अपनी युवा पीढ़ी को कैसा भविष्य दे रहे हैं.. पुलिस अपनी जांच कर रही है..., गिरफ्तारियां हो रही हैं, ...लेकिन असली सवाल यह है कि... क्या हम उस जड़ को खत्म कर पाएंगे ..जो छात्र राजनीति को अपराध की तरफ धकेल रही है?...आप इस बारे में क्या सोचते हैं?... क्या छात्र संघ चुनावों पर पूरी तरह रोक लगा देनी चाहिए?... या यूनिवर्सिटी प्रशासन को और सख्त होने की ज़रूरत है? ...हमें कमेंट्स में अपनी राय ज़रूर बताएं..और अगर यह रिपोर्ट आपको ज़रूरी लगी हो..., तो इसे ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें ताकि यह आवाज़ सही लोगों तक पहुंचे।