CBI अफसर बनकर उड़ाए 1.29 करोड़

 आज की सबसे बड़ी खबर राजधानी लखनऊ से आ रही है,... जहाँ साइबर अपराधियों ने एक रिटायर्ड मर्चेंट नेवी अफसर को.... अपने जाल में फँसाकर ...1.29 करोड़ रुपये की ठगी कर डाली।.... जी हाँ, यह एक सनसनीखेज मामला है,.... जिसमें जालसाजों ने तथाकथित डिजिटल अरेस्ट के जरिए ...पीड़ित को डराया-धमकाया और... उनके बेटे से लाखों रुपये ऐंठ लिए।... आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं ...और जानते हैं कि कैसे साइबर अपराधी इस शातिर साजिश को अंजाम देने में कामयाब हुए।...यह घटना लखनऊ के सरोजनी नगर थाना क्षेत्र की है,... जहाँ मर्चेंट नेवी से रिटायर्ड अफसर सुरिंद्र पाल सिंह साइबर ठगों का शिकार बन गए।.... जालसाजों ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के फर्जी आरोपों में ....फँसाने का डर दिखाया और... छह दिन तक तथाकथित डिजिटल अरेस्ट में रखा।.... इस दौरान, ठगों ने पीड़ित के बेटे से ...1.29 करोड़ रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए।...सुरिंद्र पाल सिंह ने बताया कि यह सब... एक अज्ञात नंबर से आई कॉल के साथ शुरू हुआ।... कॉलर ने खुद को सीबीआई अफसर बताते हुए... दावा किया कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का गंभीर मामला दर्ज है.... और जांच चल रही है।....यह सुनते ही सुरिंद्र पाल घबरा गए।.... जालसाजों ने उनकी इस घबराहट का फायदा उठाया और.... उन्हें वीडियो कॉल और मोबाइल फोन के जरिए ...लगातार निगरानी में रखा। ...इतना ही नहीं, उन्हें घर से बाहर न निकलने की सख्त हिदायत दी गई।... ठगों ने पीड़ित को यह यकीन दिलाया कि ...अगर वे मामले को "निपटाने" के लिए पैसे जमा करेंगे,... तो उनकी समस्या हल हो जाएगी और ....उनका पैसा सुरक्षित रहेगा....इस दौरान साइबर अपराधियों ने... सुरिंद्र पाल के बेटे को भी अपने जाल में फँसाया। ...डर और दबाव के चलते उनके बेटे ने धीरे-धीरे... 1.29 करोड़ रुपये ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए।... जालसाजों ने पीड़ित परिवार को बार-बार आश्वासन दिया... कि उनका पैसा सुरक्षित है और ...जल्द ही लौटा दिया जाएगा।... लेकिन जब लंबे समय तक पैसे वापस नहीं आए, ...तो परिवार को ठगी का अहसास हुआ। ...इसके बाद उन्होंने सरोजनी नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई, ....और अब पुलिस इस पूरे मामले की गहन छानबीन कर रही है....यह मामला न केवल साइबर अपराध की गंभीरता को दर्शाता है..., बल्कि यह भी बताता है कि कैसे शिक्षित और जागरूक लोग भी... इन ठगों का शिकार बन सकते हैं।... डिजिटल अरेस्ट जैसे नए तरीकों का इस्तेमाल करके अपराधी ...लोगों को डराने और उनके पैसे हड़पने की कोशिश कर रहे हैं। ... लेकिन सवाल यह है कि ...आखिर यह डिजिटल अरेस्ट होता क्या है?... चलिए, समझते हैं...दरअसल, यह एक ऐसी तकनीक है... जिसमें साइबर अपराधी फर्जी कॉल्स, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, या मैसेज के जरिए... लोगों को डराते हैं और उन्हें घर में ही... "नजरबंद" जैसी स्थिति में रखते हैं।.... इस दौरान पीड़ित को लगता है कि... वह किसी सरकारी जांच का हिस्सा है, जबकि असल में वह ठगों के जाल में फँस चुका होता है।... तो सवाल यह उठता है कि आप और हम ऐसी ठगी से कैसे बच सकते हैं? ....यहाँ कुछ जरूरी सावधानियाँ हैं, जो आपको ध्यान में रखनी चाहिए..पहला अज्ञात कॉल्स से सावधान रहें..और अगर कोई खुद को सीबीआई, पुलिस, या किसी सरकारी अधिकारी के रूप में पेश करता है,.... तो तुरंत उनकी पहचान की पुष्टि करें... दूसरा पैसे ट्रांसफर करने से पहले जांच करें.. और कोई भी राशि ट्रांसफर करने से पहले अपने परिवार, दोस्तों, या स्थानीय पुलिस से सलाह लें।...तीसरा साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर संपर्क करें....बता दे की  भारत में साइबर अपराध की शिकायत के लिए... 1930 पर कॉल करें या... नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करें।...चौथा पर्सनल जानकारी शेयर न करें... बैंक खाता, ओटीपी, या अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें।...यह बेहद जरूरी है कि हम... साइबर अपराधियों के खिलाफ सतर्क रहें और... अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करें।..