देश के टॉप डॉक्टर क्यों छोड़ रहे हैं AIIMS की नौकरी?
- क्यों देश के सबसे काबिल डॉक्टर AIIMS जैसी संस्था को छोड़ रहे हैं?... ये सवाल इसलिए गंभीर है,…. क्योंकि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन सालों में… 429 फैकल्टी डॉक्टरों ने देशभर के एम्स संस्थानों से इस्तीफा दे दिया है…. अकेले देश के सबसे प्रतिष्ठित,… दिल्ली एम्स से 52 डॉक्टरों ने नौकरी छोड़ी है…. तो क्या ये सिर्फ पैसे का खेल है,… या पर्दे के पीछे की कहानी कहीं ज्यादा गहरी और चिंताजनक है? …ये संकट सिर्फ इस्तीफों का नहीं, ..बल्कि खाली पदों का भी है….. कई एम्स में लगभग हर तीन में से.. एक फैकल्टी पद खाली पड़ा है…, और दिल्ली एम्स में भी करीब 35% पद खाली हैं. ..इसकी पहली और सबसे बड़ी वजह है वेतन…. AIIMS डॉक्टर को प्राइवेट सेक्टर के मुकाबले चार से दस गुना कम सैलरी मिलती है….दूसरी वजह है काम का जानलेवा बोझ और खराब माहौल…. मरीजों की अंतहीन कतारों के बीच डॉक्टरों को रिसर्च के लिए वक्त ही नहीं मिलता,… जो उनके करियर पर फुल स्टॉप लगाने जैसा है…. ऊपर से, खासकर नए एम्स में, रहने और बच्चों के स्कूल जैसी बुनियादी सुविधाओं की भी भारी कमी है. …और तीसरी वजह है करियर में ठहराव….. भर्ती प्रक्रिया इतनी धीमी है कि प्रमोशन के रास्ते भी बंद हैं.... देश के सबसे तेज दिमाग इसलिए सिस्टम नहीं छोड़ रहे कि वे काबिल नहीं..., बल्कि इसलिए क्योंकि ये सिस्टम उन्हें उनकी काबलियत दिखाने का मौका ही नहीं दे रहा...
जिसका असर हम पर, यानी आम आदमी पर सीधा और खतरनाक है... जब एक अनुभवी डॉक्टर जाता है..., तो इलाज की क्वालिटी गिरती है....वहीं हालत ये है कि रायबरेली एम्स जैसे संस्थानों में... एक सामान्य सर्जरी के लिए मरीजों को डेढ़-डेढ़ साल तक इंतजार करना पड़ रहा है. ...सोचिए उस मरीज का दर्द, जिसे सिर्फ डॉक्टर न होने की वजह से लंबे समय तक दर्द में जीना पड़ रहा है.... इसके अलावा, जब सिखाने वाले अनुभवी टीचर ही नहीं होंगे..., तो देश को अगली पीढ़ी के अच्छे डॉक्टर कैसे मिलेंगे? ...यह एक ऐसी आग है जो धीरे-धीरे हमारे पूरे हेल्थकेयर सिस्टम को खोखला कर रही है.....सरकार को समझना होगा कि सिर्फ नई बिल्डिंग खड़ी करने से कुछ नहीं होगा,... उन बिल्डिंग्स में काम करने वाले डॉक्टरों को भी रोकना होगा.... वरना वो दिन दूर नहीं, जब एम्स की भव्य इमारतें तो होंगी, ..पर उनमें इलाज करने वाले हाथ नहीं मिलेंगे,... और इसका सबसे बड़ा नुकसान भारत के आम नागरिक को ही उठाना पड़ेगा