बांग्लादेश में दिपू के हत्या की पूरी कहानी
बांग्लादेश के मैमनसिंह की एक फैक्ट्री…जहां काम करने वाला दीपू चंद्र दास…कुछ ही घंटों में भीड़ का शिकार बना।…आरोप लगाया गया कि दीपू ने फेसबुक परधार्मिक भावनाएं आहत करने वाली पोस्ट की है…लेकिन आरएबी-14 के कंपनी कमांडरएमडी समसुज्जमां ने साफ कहा —
ऐसा कोई सबूत नहीं मिला।…
.हालात बिगड़ते देख…फैक्ट्री के सीनियर मैनेजर आलमगीर हुसैन ने…शाम करीब 7:30 बजे दीपू से जबरन एक ‘नकली इस्तीफा’ तक लिखवा लिया…ताकि भीड़ शांत हो जाए।लेकिन नफरत शांत नहीं हुई।…मैनेजमेंट ने पुलिस को सूचना देने में देरी की…
कहते रहे — हम अंदर ही मामला सुलझा लेंगे।..इसी बीच शिफ्ट बदली…
नई भीड़ आई…खबर फैली…और फैक्ट्री के बाहर…स्थानीय लोग भी जमा हो गए।..फिर जो हुआ…वो इंसानियत पर धब्बा है।भीड़ ने दीपू को बाहर खींचा…
पीटा…और जिंदा जला दिया।…
बांग्लादेश पुलिस ने…इस जघन्य हत्या में अब तक
12 लोगों को गिरफ्तार किया है।…लेकिन सवाल ये है —जब कोई दोष साबित नहीं हुआ…तो इंसाफ की जगह....भीड़ को कानून क्यों बनने दिया गया?...अगर आप मानते हैं कि भीड़ की हिंसा के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए…...तो इस वीडियो को शेयर कीजिए…
अपनी आवाज़ उठाइए…क्योंकि अगला शिकार कोई और भी हो सकता है।
PUSHPANJALI PANDEY 