रीवा में किसानों पर लाठीचार्ज का सच!
सानों पर लाठियाँ...और वजह सिर्फ इतनी कि.... वो अपने हक का खाद मांग रहे थे!...सोचिए... जिस अन्नदाता की मेहनत से देश का पेट भरता है..., वही किसान आज खाद की एक बोरी के लिए... लाइन में पीटा जा रहा है...। सवाल ये है – आखिर किसानों की सुनवाई कब होगी?.."नमस्कार, आप देख रहे हैं सूरमा भोपाली... और मैं हूँ आपके साथ पुष्पाजंली पाण्डेय.. मध्यप्रदेश के रीवा और मऊगंज से जो तस्वीरें सामने आई हैं,... उन्होंने पूरे देश को हिला कर रख दिया है।...किसान... दिन-रात लाइन में खड़े है... महिलाएँ, बुज़ुर्ग तक भूख-प्यास सहते रहे... और जब मांग पूरी नहीं हुई, ...तो पुलिस ने उन्हीं किसानों पर लाठियाँ बरसा दीं।...क्या ये न्याय है? क्या यही है ‘अन्नदाता सम्मान’?...रीवा में किसानों का सब्र टूट गया है.. घंटों लाइन में लगने के बाद भी खाद नहीं मिली...भीड़ में महिलाएँ भी मौजूद थीं..., लेकिन पुलिस ने किसी को नहीं बख्शा।... किसानों का कहना है कि... कई लोग 48 घंटे से भी ज्यादा समय से लाइन में थे,... लेकिन ना टोकन मिला और ना ही खाद।...एक किसान ने बताया की – ‘मेरा भाई गेट पर खड़ा था, ...उसे अंदर ले जाकर 500 से ज्यादा लाठियाँ मारी गईं।... वो बेहोश पड़ा रहा… और हमें बाहर भगा दिया गया..मऊगंज में भी हालात अलग नहीं थे।... यहाँ भी किसान कतारों में खड़े,... कई किलोमीटर दूर से आए,... लेकिन लौटे खाली हाथ।... गुस्से में किसानों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाज़ी की....प्रशासन की सफाई आई – उनका कहना है कि... किसानों ने अफसरों को कमरे में बंद कर दिया था, ...इसलिए हल्का बल प्रयोग किया गया।...लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि... किसान खाद के बिना लौट रहे हैं... और पुलिस का डंडा उनके जख्म और गहरा कर रहा है...अब सवाल ये उठता है ..क्या किसानों की जरूरतें सरकार तक पहुँच रही हैं?...क्या खाद का वितरण सही तरीके से हो रहा है?...और सबसे बड़ा सवाल – ...क्या अन्नदाता को उसका हक पाने के लिए लाठियाँ सहनी पड़ेंगी..."भारतीय किसान यूनियन ने सरकार से जांच की मांग की है।...
उन्होंने सवाल उठाया है कि... अगर खाद वास्तव में 148 सेवा सहकारी समितियों में बंटी है..., तो किसानों तक क्यों नहीं पहुँच पा रही.....?क्या सप्लाई में गड़बड़ी है... या फिर सिस्टम में लापरवाही?...अन्नदाता... जो धरती पर भगवान कहा जाता है, ...वही आज अपमानित हो रहा है।...देश का पेट भरने वाला किसान..., अपने घर की भूख मिटाने के लिए लाठी खा रहा है।...
सोचिए,.. जब किसान ही नहीं बचेगा,.... तो रोटी कहाँ से आएगी..."दोस्तों, ये सिर्फ रीवा या मऊगंज का मुद्दा नहीं है..., ये देशभर के किसानों की सच्चाई है।
आपका क्या मानना है...क्या सरकार किसानों की असली परेशानियों को समझ रही है?...
क्या इस तरह के हालात में.. किसानों का गुस्सा फूटना गलत है?..अपनी राय हमें कमेंट में ज़रूर बताइए....और वीडियो को लाइक और शेयर करिए..., ताकि ये आवाज़ हर उस शख्स तक पहुँचे जिसे किसानों का दर्द सुनना चाहिए।...और हाँ, चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें, ...क्योंकि हम अन्नदाता की आवाज़ लगातार आप तक पहुँचाते रहेंगे।..."
PUSHPANJALI PANDEY 