उत्तराखंड में देर रात फटा बादल 80 घर तबाह
उत्तराखंड के चमोली में देर रात आसमान से आफत बरसी… जब लोग गहरी नींद में थे, एक बादल फटने से करीब 80 घर… मलबे में तब्दील हो गए…दो लोग अब भी लापता हैं…यह सिर्फ एक और बादल फटने की घटना नहीं है, …बल्कि देवभूमि के सीने पर लगा एक और गहरा ज़ख्म है… यह कहानी है कुदरत के कहर,… इंसानी संघर्ष और उस उम्मीद की…, जिसे बचाने के लिए हर कोई जुटा हुआ है…yबता दे की रात करीब एक बजे,.... चमोली की थराली तहसील में बादल फटा...और पानी का सैलाब अपने साथ पत्थर और मलबा लेकर आया और... जो भी रास्ते में था, उसे निगलता चला गया...गहरी नींद में सो रहे लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला... कुछ ही मिनटों में घर मलबे का ढेर बन गए और... सड़कें उफनती नदियों में बदल गईं...यह तबाही थराली तहसील के राड़ीबगड़ इलाके में हुई... स्थानीय लोगों ने एक भयानक गड़गड़ाहट सुनी और... इससे पहले कि वे कुछ समझ पाते,... मलबे का सैलाब उनके घरों में घुस गया... कंक्रीट के मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गए... कभी चहल-पहल वाला थराली बाजार आज मलबे का समंदर है...यहां तक कि एसडीएम का सरकारी आवास भी मलबे से पट गया...मुख्य सड़कें बंद हैं,.... जिससे पूरा इलाका बाकी दुनिया से कट गया है... और राहत कार्यों में भारी मुश्किल आ रही है..सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, ...लगभग 80 घर और दुकानें तबाह हो चुके हैं... लेकिन सबसे दर्दनाक है दो जिंदगियों का लापता होना... इनमें सागवाड़ा गांव की 20 साल की कविता और ...चेपड़ों बाजार के एक बुजुर्ग शामिल हैं..., जिनके मलबे में दबे होने की आशंका है... रेस्क्यू टीमें उन्हें ढूंढने की पूरी कोशिश कर रही हैं,... लेकिन वक्त के साथ उम्मीदें कमजोर पड़ रही हैं...सैकड़ों लोग बेघर हो गए हैं और... राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं...ग्राउंड जीरो पर मंजर भयावह है...जहां कभी घर और बाजार थे,... वहां आज सिर्फ तबाही का मलबा और डरावनी खामोशी है.. बड़े-बड़े पत्थर और पेड़ घरों की छतों को फाड़कर अंदर घुस गए हैं...एक स्थानीय ने बताया, 'रात को ऐसा लगा जैसे... कोई बम फट गया हो... हम बस भागकर अपनी जान बचा पाए,... हमारा घर, हमारी दुकान,... सब कुछ आंखों के सामने बह गया.... यहां हर कोई डरा हुआ है ...और अपने भविष्य को लेकर चिंतित है..इस तबाही के बीच, SDRF और NDRF की टीमें बचाव कार्य में जुटी हैं...लगातार बारिश और टूटी सड़कें उनके मिशन को और मुश्किल बना रही हैं.... भारी मशीनें पहुंचाना मुश्किल होने के कारण... ज्यादातर काम हाथों से ही करना पड़ रहा है....बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) के जवान बंद रास्तों को खोलने में दिन-रात लगे हैं..., ताकि राहत सामग्री प्रभावितों तक पहुंच सके..चमोली की यह त्रासदी एक चेतावनी है कि... हमें विकास और पर्यावरण में संतुलन साधना होगा... फिलहाल, पहली प्राथमिकता लापता लोगों को ढूंढना और ...प्रभावितों तक मदद पहुंचाना है...मौसम विभाग ने आगे भी बारिश का अलर्ट जारी किया है,.... जो बचाव कार्य के लिए एक बड़ी चुनौती है... इस मुश्किल समय में देवभूमि के लोगों को ..आपके साथ की जरूरत है... उनकी आवाज को आगे बढ़ाने और उन तक मदद पहुँचाने के लिए इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें...