सरकार न कर पाई… इन युवाओं ने कर दिखाया! दिल छू लेने वाली कहानी

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर... उज्जैन ने राष्ट्रभक्ति की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने पूरे देश का ध्यान खींच लिया... शहीद समरसता मिशन के युवाओं ने 19 वर्षों से उपेक्षित रहे शहीद.... गजेंद्र राव सुर्वे के वृद्ध माता-पिता को 21 लाख रुपए की लागत से नया... घर बनाकर समर्पित किया... यह कार्य बिना किसी सरकारी अनुदान के पूरी तरह सामाजिक सहयोग से संभव हुआ... बता दे की साल 2006 में, उज्जैन के सिपाही गजेंद्र राव सुर्वे लद्दाख में,... आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हो गए... ...उनका एक ही सपना था - अपने माता-पिता के लिए एक पक्का घर बनाना.... लेकिन यह  सपना पूरा करने से पहले हील वह सहीद हो गए...और उनका सपना अधूरा रह गया....सरकार ने वादे तो बहुत किए, पर जैसे-जैसे समय बीता, ...वे धुंधले पड़ गए.... पूरे उन्नीस साल तक,... शहीद के बूढ़े माता-पिता, अशोक और कल्पना सुर्वे, ...सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते रहे और.... एक किराए के मकान में तंगहाली में जीते रहे....लेकिन जब इस परिवार के संघर्ष की कहानी "शहीद समरसता मिशन" तक पहुंची, तो... उन्होंने वो कर दिखाया जो 19 सालों में नहीं हुआ.... मिशन में शहीद गजेंद्र के अधूरे सपने को पूरा करने का संकल्प लिया...और सरकारी मदद का इंतज़ार किए बिना.., आम जनता से सहयोग मांगा गया....और देखते ही देखते,... देशवासियों के प्यार और सम्मान से लगभग... 21 लाख रुपये इकट्ठे हो गए,... ताकि शहीद के परिवार को उनके सम्मान की छत मिल सके...और अब स्वतंत्रता दिवस के मौके पर, शहीद के माता-पिता को उनका नया घर, ..."राष्ट्र शक्ति मंदिर" सौंपा गया..... साथ ही दर्जनों युवाओं ने शहीद की माँ कल्पना सुर्वे के सम्मान में...दर्जनों अपनी हथेलियाँ ज़मीन पर बिछा दीं, ....और माँ उन पर चलकर अपने घर में दाखिल हुईं....उनकी आँखों में आँसू थे,... जो दुःख के नहीं, ...बल्कि 19 साल बाद मिले इस अपनेपन और सम्मान के थे....
शहीद की माँ ने कहा, "...जो काम सरकार इतने सालों में नहीं कर पाई,... वो इन बेटों ने कर दिखाया.... महाकाल ने मेरा एक बेटा ले लिया था,... पर आज मुझे इतने सारे बेटे वापस मिल गए."...उज्जैन की यह घटना एक मांग भी करती है कि.... शहीदों के परिवारों के कल्याण के लिए एक ठोस कानून बने,... ताकि किसी और परिवार को ऐसा दर्द भरा इंतज़ार न करना पड़े.... यह कहानी सच्ची देशभक्ति की मिसाल है.... अगर इस कहानी ने आपके दिल को छुआ है..., तो इस संदेश को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचाएं.