एनडीए का 2010 वाला जादू फिर चला! कैसे? जानें पूरी कहानी


बिहार चुनाव: एग्ज़िट पोल फेल, जनता ने खेल कर दिया
  एनडीए का 2010 वाला जादू फिर चला! कैसे? जानें पूरी कहानी
एकंर - बिहार… एक ऐसा राज्य, है...जिसे जितना समझने की कोशिश करो, उतना ही चौंका देता है।...
आप सोचते हैं कि इस बार समीकरण समझ गए?...लेकिन बिहार मुस्कुरा कर कहता है—‘अरे बाबू, बिहार है… इतना आसान नहीं।...और यही फिर हुआ इस चुनाव में!...बिहार की माटी में एक जादू है....जो हर बार हम सबको दंग और हैरान कर देता है।...जब-जब किसी को लगता है कि बिहार की नब्ज पकड़ ली है, ....तब बिहार नए अंदाज़ में कहता है...—फिर से पढ़ो भईया कहानी अभी बाकी है....इस बार भी वही हुआ।...छपरा से पटना तक वोट ऐसा गिरा... जैसे लोगों ने मन बना लिया हो कि... ‘आज कहानी बदलनी ही है।’....और जब परिणाम आए… तो एग्ज़िट पोल वाले गर्दन पकड़कर बैठ गए—“ये क्या हुआ?”....एनडीए ने ऐसा ‘गर्दा उड़ा दिया’ कि हर तरफ सिर्फ यही कहा गया....2010 की याद फिर से ताज़ा हो गई।...बिहार में अगर एक चीज़ प्रेडिक्टेबल है.... तो सिर्फ एक जहाँ नीतीश कुमार होंगे,.. उसी का सरकार बनेगा।...
और आज 10वीं बार फिर.... मुख्यमंत्री बनकर उन्होंने साबित कर दिया कि बिहार में ‘खेला’ कैसे किया जाता है।....नीतीश कुमार ने महिलाओं को अपने सोशल इंजीनियरिंग के केंद्र में रखकर.... ऐसा माइंड-गेम खेला, जिसे कोई समझ भी नहीं पाया....—और गेम खत्म भी हो गया।...बिहार में 3.51 करोड़ महिला वोटर और इनमें से 1.34 करोड़ जीविका दीदी।...इनके खाते में सीधा ₹1000 गया—और चुनाव की दिशा ही बदल गई।...यही बिहार का असली जादू है....भईया जात-पात बाद में, पहले घर का फायदा...इसीलिए हर उस सीट पर जहाँ महिलाएँ ज़्यादा थीं,.... वहाँ एनडीए का स्ट्राइक रेट 90% तक पहुंच गया।...125 यूनिट फ़्री बिजली…गाँव–गाँव जनता को लगा...जब रोशनी मिल रही है, तो लालटेन की क्या जरूरत?.और माहौल बदल गया।....मोदी जी भी कह रहे थे—“लालटेन का जमाना गया।”...एनडीए ने सोशल इंजीनियरिंग में पूरा होमवर्क किया...स्वर्ण, दलित, अति पिछड़ा, कुर्मियों से लेकर ...वैश्य, यादव और अन्य जातियों तक सबको कवर किया।...चिराग पासवान, मांझी, कुशवाहा को साथ लेने से… जो OBC–Dalit समीकरण बना...उसने आरजेडी की लहर को सीधा रोक दिया।...वहीं 240 सीटों पर प्रशांत किशोर ने चुनाव लड़ लिया।...जहाँ-जहाँ लड़े, वहाँ तीसरे नंबर पर रहते हुए भी ...आरजेडी का वोट काटते हुए खेला कर दिया।....और खुद तो हारे ही—साथ में महागठबंधन को भी भारी नुकसान कराया।... यह सिर्फ बिहार नहीं...., राष्ट्रीय राजनीति का टर्निंग पॉइंट है...लेकिन अब इस सबके बीच एक बड़ा सवाल...क्या BJP नीतीश को हटाकर खुद CM बना सकती है?...संभव है…पर अभी नहीं।...क्योंकि...केंद्र में BJP को सहयोगियों की ज़रूरत है...ऐसा करने से जेडीयू–बिजेपी की एकता की मैसेजिंग टूट जाएगी...चिराग–मांझी–कुशवाहा के वोट को भी रिस्क होगा...इसलिए आने वाले समय में बीजेपी बड़ा भाई,... और नीतीश स्थिर चेहरा बने रहेंगे।...लेकिन बिहार ने फिर साबित किया...यहाँ सियासत एग्ज़िट पोल से नहीं, जनता के मूड से तय होती है।...