खाद की किल्लत से सड़कों पर उतरा किसान – आखिर खाद जा कहाँ रही है?
मध्यप्रदेश की उपजाऊ ज़मीन पर आज बवाल मचा है.... ये आग सियासत की नहीं, बल्कि उस नाउम्मीदी की है.. जो खेतों से निकलकर सड़कों पर आ गई है.... अन्नदाता और प्रशासन आमने-सामने हैं..., सड़कें जाम हैं और किसानों का गुस्सा भड़क रहा है..... इस पूरे हंगामे की जड़ में एक ही वजह है ...- खाद की किल्लत....इस खरीफ सीजन में किसानों के लिए ....सबसे ज़रूरी चीज़, यूरिया और डीएपी खाद, बाज़ारों से गायब हो गई.... प्रदेश भर में खाद सेंटरों के बाहर मीलों लंबी लाइनें लग गईं.... किसान सुबह से घर-बार छोड़कर बस एक-दो बोरी खाद की उम्मीद में घंटों इंतज़ार कर रहे हैं..... गुना में तो तेज़ बारिश के बीच भी किसान डटे रहे,... क्योंकि उन्हें पता था कि आज लाइन से हटे... तो फसल हाथ से निकल जाएगी..... प्रशासन का टोकन सिस्टम भी एक मज़ाक बनकर रह गया..... टोकन मिलने के बाद भी ...जब किसानों का नंबर आता, तो जवाब मिलता... - खाद खत्म हो गई. और बस यहीं, सब्र का बांध टूट गया....एक तरफ सरकारी सेंटरों पर ....'नो स्टॉक' के बोर्ड लगे थे,.... तो दूसरी तरफ वही खाद खुले बाज़ार में ऊंचे दामों पर बिक रही थी.... किसानों ने आरोप लगाया कि एक पूरा नेटवर्क उनकी मजबूरी का फायदा उठा रहा है.... जो डीएपी खाद सरकारी रेट पर 1350 रुपये की मिलनी चाहिए...., वही कालाबाज़ार में कहीं ज़्यादा कीमत पर मिल रही है.... सरकार कहती है कि खाद की कमी नहीं है..., लेकिन सवाल ये है कि.... वो खाद जा कहाँ रही है? ऊपर से खाद की बढ़ी हुई कीमतों ने किसानों की कमर तोड़ दी है...जब किसी ने नहीं सुनी, तो किसानों ने चक्का जाम कर दिया.... सिवनी ज़िले में किसानों ने नेशनल हाईवे जाम कर दिया..... उनकी मांग सीधी थी - हमें हमारा हक़, हमारी खाद दो. लेकिन जब उन्हें हटाने की कोशिश हुई,... तो पुलिस और किसानों में झड़प हो गई.... इसी दौरान एक तस्वीर सामने आई... जिसमें एक महिला किसान ने हताशा में पुलिसकर्मी पर चप्पल उठा ली.... ये तस्वीर उस टूटे हुए भरोसे का प्रतीक बन गई...., जो किसान और सरकार के बीच होना चाहिए.
प्रशासन मानता है कि खाद की कमी है... और जल्द नई खेप आने का भरोसा दे रहा है... लेकिन किसान पूछ रहे हैं, कितना सब्र करें?... बुवाई का वक्त निकला जा रहा है.... मध्य प्रदेश में खाद का ये संकट सिर्फ कुछ बोरियों की कमी का नहीं,... बल्कि हमारी कृषि व्यवस्था की बड़ी कमज़ोरियों को उजागर कर रहा है. ....सड़कों पर लगा जाम और झड़पें तो सिर्फ लक्षण हैं,... असली बीमारी सिस्टम में है.... सवाल अब भी वही है - क्या ...किसानों तक समय पर खाद पहुंचेगी और... क्या इस साल अन्नदाता की मेहनत को सही सिला मिल पाएगा?...