लेडी टीचर से इश्क, फिर पेट्रोल डालकर लगा दी आग

मध्य प्रदेश का नरसिंहपुर जिला, जिसे लोग 'शिक्षकों का गांव' भी कहते हैं. एक ऐसी जगह जहां के सिंहपुर जैसे गांव में लगभग हर घर में आपको कोई न कोई टीचर मिल जाएगा. लेकिन इसी शांत और पढ़े-लिखे माहौल से एक ऐसी कहानी सामने आई, जिसने गुरु-शिष्य के रिश्ते पर एक गहरा दाग लगा दिया. ये कहानी सिर्फ एक तरफा प्यार या जुनून की नहीं है. ये कहानी उस खतरनाक गुस्से की है जो तब जन्म लेता है, जब कोई 'ना' सुनना बर्दाश्त नहीं कर पाता.सोचिए, एक 18 साल का लड़का, अपनी 26 साल की टीचर के लिए एक जुनून पाले बैठा है. जब टीचर उसके गलत बर्ताव की शिकायत करती है, तो वो लड़का बदला लेने के लिए सारी हदें पार कर देता है. ये कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि नरसिंहपुर की वो हकीकत है जिसने पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया. ये कहानी हमें दिखाती है कि कैसे सम्मान और अपमान के बीच की एक छोटी सी लकीर जब मिट जाती है, तो उसका अंत सिर्फ तबाही होता है. आज हम जानेंगे कि आखिर उस एक शिकायत में ऐसा क्या था, जिसने एक छात्र को हैवान बना दिया.इस कहानी के दो अहम किरदार हैं. पहली, 26 साल की स्मृति दीक्षित. नरसिंहपुर के एक जाने-माने स्कूल में गेस्ट टीचर. गेस्ट टीचर, यानी वो शिक्षक जो एक तय सैलरी पर अपनी सेवाएं देते हैं. जिम्मेदारियां तो पूरी होती हैं, लेकिन भविष्य की सुरक्षा अक्सर नहीं होती. स्मृति भी उन्हीं हजारों टीचर्स में से एक थीं, जो पूरी लगन से बच्चों का भविष्य बनाने में जुटी थीं. वो स्कूल के अनुशासन को लेकर काफी सख्त थीं.
कहानी का दूसरा किरदार है 18 साल का सूर्यांश कोचर. सूर्यांश उसी स्कूल का पुराना छात्र था, जहां स्मृति पढ़ाती थीं. स्कूल रिकॉर्ड्स बताते हैं कि सूर्यांश की शिकायतें पहले भी आती रहती थीं और उसकी सेहत भी ठीक नहीं रहती थी. इसी वजह से स्कूल ने उसके माता-पिता को बुलाकर उसे निकाल दिया था. इसके बाद, उसने पास के ही एक सरकारी स्कूल में 12वीं क्लास में एडमिशन ले लिया था. कहते हैं कि वो अपनी उम्र से बड़े लड़कों के साथ उठता-बैठता था. पुराना छात्र होने की वजह से वो स्मृति को जानता था, और शायद यही जान-पहचान इस खौफनाक साजिश की वजह बनी. पुलिस की मानें तो सूर्यांश, टीचर के लिए एकतरफा खिंचाव महसूस करता था, एक ऐसा खिंचाव जो धीरे-धीरे एक खतरनाक जुनून बन गया.
हर कहानी में एक ऐसा मोड़ आता है, जो सब कुछ बदल देता है. इस कहानी में वो मोड़ आया 15 अगस्त को. स्वतंत्रता दिवस का दिन था, स्कूल में फंक्शन चल रहा था. टीचर स्मृति दीक्षित, मौके के हिसाब से साड़ी पहनकर स्कूल आई थीं. तभी, छात्र सूर्यांश कोचर ने सबके सामने उनकी साड़ी पर एक भद्दा, अपमानजनक कमेंट कर दिया.
ये किसी भी महिला के आत्मसम्मान पर हमला था, वो भी एक टीचर पर, उसके ही छात्र की तरफ से. स्मृति ने इसे नजरअंदाज नहीं किया. उन्होंने वही किया जो करना चाहिए था. उन्होंने स्कूल मैनेजमेंट को एक लिखित शिकायत दे दी. ये एक हिम्मत भरा कदम था. उन्होंने सोचा था कि मैनेजमेंट एक्शन लेगा और छात्र को अपनी गलती का एहसास होगा. पर उन्हें शायद इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि उनका ये सही कदम, आरोपी के गुस्से को किस हद तक भड़का देगा.
ये शिकायत सूर्यांश को चुभ गई. उसे लगा था कि टीचर बात को टाल देगी. लेकिन जब शिकायत हुई, तो उसका गुरूर टूट गया. एकतरफा जुनून अब नफरत और बदले की आग में बदल चुका था. उसे लगा कि टीचर ने उसकी बेइज्जती की है और अब वो किसी भी कीमत पर बदला लेना चाहता था. और यहीं से उस भयानक प्लान की शुरुआत हुई, जिसका अंजाम दिल दहलाने वाला था.
15 अगस्त की घटना को कुछ ही दिन हुए थे. 18 अगस्त, सोमवार का दिन. दोपहर के करीब साढ़े तीन बज रहे थे. स्मृति दीक्षित अपने घर पर थीं. उन्हें जरा भी भनक नहीं थी कि कोई बाहर मौत का सामान लेकर उनका इंतजार कर रहा है. सूर्यांश कोचर, बदले की आग में जलता हुआ, एक बोतल में पेट्रोल लेकर उनके घर पहुंच गया.उसने दरवाजा खटखटाया. स्मृति ने जैसे ही दरवाजा खोला, सामने अपने पुराने छात्र को खड़ा पाया. वो कुछ समझ पातीं, इससे पहले ही सूर्यांश ने उन पर पेट्रोल फेंक दिया. जब तक स्मृति संभलतीं, लड़के ने माचिस जलाकर उन्हें आग लगा दी. आग की लपटों में घिरी स्मृति की चीखें सुनकर घरवाले और पड़ोसी दौड़े, लेकिन तब तक सूर्यांश वहां से भाग चुका था.
मंजर बेहद खौफनाक था. एक टीचर, जो कुछ मिनट पहले तक अपने घर में सुरक्षित थी, अब आग की लपटों में घिरी हुई थी. लोगों ने किसी तरह आग बुझाई, लेकिन तब तक स्मृति का शरीर 25 प्रतिशत तक जल चुका था. उन्हें फौरन नरसिंहपुर के जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां से डॉक्टरों ने उनकी गंभीर हालत देखकर उन्हें जबलपुर रेफर कर दिया. एक गुरु, जिसे शिष्य को ज्ञान का रास्ता दिखाना था, उसी शिष्य ने उसे आग के हवाले कर दिया था.
खबर मिलते ही पुलिस फौरन एक्शन में आ गई. आरोपी की तलाश के लिए टीमें बनाई गईं. पुलिस ने तेजी दिखाते हुए कुछ ही घंटों में आरोपी सूर्यांश कोचर को डोंगरगांव इलाके से गिरफ्तार कर लिया. वो भागने की फिराक में था, लेकिन पुलिस की तेजी के आगे उसकी एक न चली.पूछताछ में मामले की परतें खुलने लगीं. पुलिस ने बताया कि ये पूरा मामला एकतरफा प्यार में हुई कहासुनी और शिकायत के बाद पैदा हुए गुस्से का नतीजा है. आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. उसने साफ-साफ कहा कि वो टीचर की शिकायत से आग-बबूला था और बदला लेने के लिए ही उसने यह सब किया.स्कूल के प्रिंसिपल ने भी पुलिस को बताया कि आरोपी छात्र की शिकायतें पहले भी आती थीं, जिस वजह से उसे स्कूल से निकाला गया था. उसने अपने मौजूदा स्कूल से दादा के साथ जयपुर जाने का बहाना बनाकर छुट्टी ली थी और तब से लौटा ही नहीं था. ये बात इशारा करती है कि शायद वो पहले से ही कुछ भयानक करने की फिराक में था. पुलिस ने आरोपी को जेल भेज दिया है और मामले की आगे की जांच कर रही है.
नरसिंहपुर की ये घटना सिर्फ एक क्राइम न्यूज नहीं है, ये हमारे समाज के लिए एक अलार्म है. ये हमें सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर हमारे नौजवान इतने हिंसक क्यों हो रहे हैं कि वो एक 'ना' तक नहीं सुन सकते? एकतरफा आकर्षण को प्यार का नाम देकर ऐसे घिनौने अपराध करने के पीछे की सोच आखिर है क्या?