फिल्में देखना शरीयत में हराम? मौलाना शहाबुद्दीन का बड़ा बयान
फिल्में देखना, सिनेमाघरों में समय बिताना ....– ये हमारे लिए मनोरंजन का हिस्सा है।.... लेकिन क्या आप जानते हैं कि ....एक धार्मिक नेता ने फिल्मों को शरीयत में.... ‘हराम’ और ‘नाजायज’ करार दिया है? ...जी हां, चाहे फिल्म पीएम मोदी पर हो या योगी पर,... इसे देखना गुनाह है... ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष ....मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का ये बयान चर्चा में है।.... आइए, जानते हैं इस बयान की पूरी सच्चाई....ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने.... एक बड़ा बयान दिया है, जिसने सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक हलचल मचा दी है।..... उन्होंने साफ कहा है कि फिल्म देखना और दिखाना, ....दोनों ही इस्लामिक शरीयत के हिसाब से नाजायज और हराम है।... मौलाना ने मुस्लिम समुदाय से अपील की है ....कि कोई भी फिल्म, चाहे वह किसी भी शख्सियत पर बनी हो... – फिर वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों..., योगी आदित्यनाथ हों, या कोई और... – इसे हरगिज न देखें।....मौलाना शहाबुद्दीन ने अपने बयान में कहा, ....“मैं तमाम मुसलमानों से..., नौजवानों, महिलाओं, पुरुषों, बच्चों और बुजुर्गों से अपील करता हूं कि....शरीयत की रोशनी में फिल्मों से दूर रहें।....” उनके मुताबिक, फिल्म देखना इस्लामिक नियमों के खिलाफ है,... और जो इसे देखता है, वह शरीयत के कटघरे में खड़ा होगा।.... इतना ही नहीं, उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई फिल्म देखता है...., तो वह खुदा की बारगाह में मुजरिम करार दिया जाएगा। ....मौलाना ने जोर देकर कहा कि शरीयत का पालन करने पर सवाब मिलेगा,..... और न करने पर गुनाह होगा।.... यह बयान ऐसे समय में आया है,.... जब सिनेमा और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स लोगों के जीवन का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं।.... खासकर युवाओं में फिल्में और वेब सीरीज का क्रेज जबरदस्त है।.... मौलाना का ये फतवा न सिर्फ धार्मिक बल्कि सामाजिक और... सांस्कृतिक स्तर पर भी बहस छेड़ सकता है।.... सवाल उठता है कि क्या ये बयान मुस्लिम समुदाय के बीच.... सिनेमा को लेकर नजरिया बदलेगा?.... या फिर ये व्यक्तिगत पसंद और धार्मिक आस्था के बीच टकराव को बढ़ाएगा? ....मौलाना ने किसी खास फिल्म का नाम तो नहीं लिया, ....लेकिन ‘मोदी’ और ‘योगी’ जैसे नामों का जिक्र करके.... सियासी हलकों में भी चर्चा तेज कर दी है।.... कुछ लोग इसे धार्मिक मार्गदर्शन मान रहे हैं, ....तो कुछ इसे आजादी और व्यक्तिगत पसंद पर सवाल उठाने वाला कदम बता रहे हैं। ....और अब सवाल यह है कि—क्या मुसलमान समाज में लोग इस अपील को मानेंगे? ....या फिर इसे सिर्फ एक धार्मिक राय मानकर नज़रअंदाज़ करेंगे?… क्योंकि मौलाना का बयान सीधा उन युवाओं और... फैमिली से जुड़ा है, जो अक्सर सिनेमा हॉल जाते हैं...मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने साफ कहा...—“अगर कोई अमल करेगा, तो उसे सवाब मिलेगा। ...लेकिन अगर नहीं करेगा, तो वह गुनहगार होगा।
PUSHPANJALI PANDEY 