रामरहीम को जेल या मजाक..? 14 बार मिली पैरोल
- राम रहीम को 14 बार पैरोल… न्याय का मज़ाक?
बलात्कारी बाबा जेल से बाहर, सत्संग-शो-वीडियो सब चालू
एक तरफ रेप, दूसरी तरफ प्रवचन… यही है भारत का कानून?
क्या कभी आपने सुना है कि…कोई अपराधी जो महिलाओं के साथ गंदी हरकत करने…और किसी आदमी की हत्या करने जैसे... जघन्य अपराधों का दोषी हो वो जेल से जब चाहे बाहर निकल आए.. जब मर्जी हो छुट्टी पर जाए.. कभी 20 दिन की छुट्टी कभी 40 दिन की.. कभी बर्थडे मनाने की तो कभी पार्टी करने की... कभी गाना रिकॉर्ड करने की कभी सत्संग करने की... मानो जैसे उसके लिए जेल कोई जेल नहीं ...रिसोर्ट हो जहां से जब मन किया बाहर आ गए... भजन किया वीडियो बनाया तालियां बजवाई... सरकार सिस्टम को अपने जूते की नोक पर रखा... और ये रिपीट होता रहा ...क्या यकीन होगा आपको...लेकिन राम रहीम के केस में यही हो रहा है... वो आदमी जिस पर वेब सीरीज बनाकर भी... दुनिया को दिखाया गया कि... देखिए भक्ति के नाम पर ऐसे फर्जीवाड़ा होता है... वो आदमी जिसके के ऊपर सजा तय हो गई... वो आज भी आराम की जिंदगी जी रहा है... और यह बता रहा है कि.... हम उस देश में रहते हैं.... जहां पर कानून दो तरह से काम करता है..अमीरों के लिए अलग, गरीबों के लिए अलग...इस देश में आम लोगों के लिए जेल सजा होती है.. सलाखों के पीछे की जिंदगी डर और तकलीफों से भरी होती है... लेकिन राम रहीम जैसे रसूखदारों के लिए जेल... मानो एक ब्रेक होता है... एक ब्रेक जहां वीवीआईपी ट्रीटमेंट से बाहर निकल कर वो वापस... भगवान बनने का नाटक करते हैं... और यह हमें शर्म से शर्मसार करता है... क्योंकि यह हमारे सिस्टम का वो चेहरा है ...जो बताता है कि कानून सिर्फ गरीबों पर सख्त होता है.... और अमीरों के सामने ...हमारे देश की सरकारें हमारे देश का सिस्टम और ....हमारे देश की न्यायिक व्यवस्था घुटने टेक देती है...राम रहीम को 20 साल की सजा सुनाई गई थी... लेकिन जिस तरह से उसका अपराध साबित हुआ था ...वह सजा भी कम थी ......लेकिन इसके बावजूद हर कुछ महीनों पर... जिस तरह से पैरोल से बाहर निकलकर वो ज्ञान देता है... प्रशासन जिस तरह से उसके कदमों में घिरा पड़ा रहता है...यह सवाल उठाता है कि क्या भारत में सजा या बेल...सियत देखकर होती है?... क्या इंसाफ का मतलब सिर्फ आम आदमी को परेशान करना है....और रसूखदारों के लिए जेल भी उत्सव है?... अगर एक बलात्कारी खुलेआम धार्मिक नेता बनकर... जेल से बाहर निकलता है, भीड़ जुटाता है... तो उस भीड़ से लेकर उस न्यायिक व्यवस्था,... उस प्रशासनिक व्यवस्था और... उस राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल उठता है... क्योंकि यह पूरे तंत्र का मजाक है.. और इसीलिए आज हम चाहते हैं कि... इस विषय पर बात की जाए...बताया जाए कि कैसे राम रहीम के नाम....पैरोल का खेल चल रहा है.... साल 2017 में जब गुरमीत राम रहीम को.... दो साधवियों के साथ बलात्कार और... एक पत्रकार... रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में... 20 साल की सजा सुनाई गई तो... उस वक्त देश को यह लगा कि... नहीं इंसाफ हो रहा है.... देर से ही सही लेकिन इंसाफ है... लेकिन असली चेहरा तब सामने आया... जब पैरोल नाम का सर्कस शुरू हुआ... आंकड़ों के अनुसार... अक्टूबर 2020 में एक दिन की पैरोल मिलती है.... मई 2021 में फिर एक दिन की पैरोल मिलती है...फरवरी 2022 में 21 दिन की पैरोल .जून 2022 में फिर 30 दिन की पेरोल और अक्टूबर 2022 में 40 दिन की पैरोल..जनवरी 2023 में फिर 40 दिन की पैरोल...और जुलाई में फिर 30 दिन की पेरोल मिलती है... नवंबर में फिर 21 दिन की पैरोल मिलती है....और अगले साल जनवरी में 50 दिन की पैरोल मिलती है....अगस्त में भी 21 दिन की पेरोल मिलती है... सितंबर में 21 दिन की पैरोल मिलती है...जनवरी में इस साल 30 दिन की पैरोल मिली...अप्रैल में दूसरी बार 21 दिन की पैरोल मिली और.... अब अगस्त के महीने में 40 दिन की पैरोल मिली....कहानी का सार यह है कि... 2020 से लेकर 2025 के बीच में राम रहीम को ...14 बार जेल से पैरोल मिली... यानी हर साल यह आदमी 90 दिन से ज्यादा जेल से बाहर रहा है...एक सजायाफ्ता बलात्कारी हत्यारा... हर चौथे दिन जेल से बाहर झांकता है...जैसे मानो कोई कैदी नहीं बल्कि... कोई नेता या सेलिब्रिटी या ...कोई एनआरआई जो वापस अपने मुल्क लौटा हो और.... इस बार भी यही हुआ... हनीप्रीत जिसके किस्से आपने खूब सारे सुने होंगे... उसे सिरसा के डेरे में लेने पहुंची... और अगले 40 दिन तक अब वह.... अपना जन्मदिन मनाएगा.. भक्तों के बीच एक बलात्कारी राजा की तरह विराजेगा,.. प्रवचन देगा, ज्ञान देगा और... हमारे देश में सरकार,... सिस्टम, न्यायिक व्यवस्था सब देखती रहेगी...सवाल यह है कि यह न्याय है या फिर सत्ता का धंधा?... यह सजा है या फिर सैर सपाटा?... और कैसे हमारे देश में... एक बलात्कारी वीवीआईपी ट्रीटमेंट पाता है... जबकि गरीब सालों साल कोर्ट की तारीखें गिनता है...राम रहीम अब सिर्फ एक अपराधी नहीं है... बल्कि हमारी व्यवस्था के मुंह पर पड़ा एक तमाचा है... जो चीख-चीख कर कहता है... कि अगर तुम्हारे पास भीड़ है, रसूख है...., राजनीतिक गठजोड़ है तो फिर जेल में भी तुम आजाद हो...राम रहीम की कहानी सिर्फ पैरोल की नहीं... बल्कि पूरे सिस्टम की नाकामी का सर्टिफिकेट है ....जो बताता है कि इंसाफ खरीदा जा सकता है...सजा सिर्फ दिखावे की चीज बनी है...और अगर आपके मन में सवाल है कि.. यह सब क्यों है? ...कैसे कानून का मजाक है? ...तो इन सब के पीछे वही सियासत है.. जिसने देश को चौपट कर रखा है... आपको बता दे की.. हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और दिल्ली में ...इसके लाखों अनुयायी हैं.... जो बड़ा वोट बैंक बनाते हैं... हर बार पैरोल के पीछे कोई ना कोई बहाना होता है...चाहे जन्मदिन हो, सत्संग हो, धार्मिक आयोजन हो, या पिता की पुन्यतिथि... लेकिन असलियत यह है कि... यह मौके अक्सर चुनावों के आसपास लिए जाते हैं... जैसे जनवरी 2024,... लोकसभा चुनाव से पहले 50 दिन की पैरोल,... अक्टूबर 2024, हरियाणा विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 20 दिन की पैरोल,... जनवरी 2025, दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले 30 दिन की पैरोल..यह संयोग नहीं बल्कि सत्ता और वोट की सियासत है... डेरा सच्चा सौदा का प्रभाव इतना है कि... सरकारें और प्रशासन नतमस्तक हैं...वह जेल से बाहर आता है, सत्संग करता है...अनुयायियों को धर्म और सेवा का पाठ पढ़ाता है...लेकिन यह कोई सेवा नहीं बल्कि नेताओं के लिए वोट बटोरने का हथियार है...और यह अफसोसजनक है, शर्मनाक है..... समाज के तौर पर जो लोग इनके चरणों में जाकर नतमस्तक हो रहे हैं... उनसे भी हमारा सवाल है कि ...जो अपराध उन लड़कियों के साथ हुआ था... जो अपराध उस पत्रकार के साथ हुआ था ...यही अगर आपकी बहन बेटी मां या... आपके भाई के साथ हुआ होता... तो भी क्या आज आप नतमस्तक होते?.. सजायाफ्ता व्यक्ति को आप भगवान बनाकर रहते... इस देश में आम आदमी के लिए जेल एक बुरा सपना है...छोटे-मोटे अपराधों में सालों तक जेल में सड़ना पड़ता है..जमानत के लिए ना पैसा होता है ना वकील ना रसूख..जेल से बाहर आने के बाद समाज उसे घिनौनी नजर से देखता है... लेकिन राम रहीम जैसे लोग जेल को अपने डेरे का गेस्ट हाउस बना चुके हैं... वो बाहर आकर प्रवचन देते हैं...लेकिन समस्या यह है कि इसके लिए जिम्मेदार सिर्फ शासन प्रशासन नहीं है...इसके लिए जिम्मेदार हमारे आप जैसे वो लोग भी हैं... जो जानते हुए कि इन्होंने क्या घटनाएं की हैं... इन्हें भगवान बनाते हैं.., जब तक आप इनके लिए तालियां बजाना या इनके कहने पर...किसी भी राजनीतिक पार्टी को वोट देना बंद नहीं करेंगे,... तब तक यह ऐसे ही आपके साथ.... ऐसी घटनाओं को करके सियासतदानों से..., जेल प्रशासन से, कोर्ट कचहरी से अपने लिए रास्ता निकाल लेंगे...अगर आप चाहते हैं कि कानून सबके लिए बराबर हो तो.... उनको बदलने से पहले हमें ...समाज के तौर पर बदलना पड़ेगा... नहीं तो देखते रहिए...आज किसी और की बहन बेटी है...और आप खामोश है...कल को शायद आपकी होगी...तब भी क्या आप खमोस रहेगें