खजुराहो मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, क्यों मचा बवाल?

अगर आप कोर्ट में जनहित याचिका लगाए....और आप कोर्ट के द्वारा किसी बड़े फैसले के सुनाए जाने का इंतजार करते हैं... और कोर्ट की तरफ से जज साहब कहते हैं कि... ऐसा है भैया जाके इस मामले में अब भगवान से ही कहिए... कि वह कुछ करें। ...ऐसा ही कुछ हुआ है मध्य प्रदेश से जुड़े हुए..एक  मामले में... जिसको लेकर याचिका सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई थी... और जज साहब ने कहा कि अब भगवान से ही जाकर कहिए कि... वह इस मामले में कुछ कर दे।....दरअसल, मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध खजुराहो मंदिर परिसर से जुड़ा ये विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था।.... खजुराहो, जो यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है, ...चंदेल राजाओं द्वारा निर्मित इन मंदिरों की वास्तुकला दुनिया भर में मशहूर है।... यहां जवारी मंदिर में भगवान विष्णु की ...7 फीट ऊंची प्रतिमा है, ...जो सिर कटी अवस्था में है। ...याचिकाकर्ता राकेश दलाल ने इस क्षतिग्रस्त मूर्ति को.... बदलने और उसकी प्राण प्रतिष्ठा करने की मांग करते हुए... जनहित याचिका (PIL) सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी।... उन्होंने दावा किया कि मुगल आक्रमणों के दौरान ये मूर्ति क्षतिग्रस्त हुई, और... औपनिवेशिक काल की उपेक्षा व स्वतंत्रता के बाद की निष्क्रियता के कारण... आजादी के 77 साल बाद भी इसका पुनर्निर्माण नहीं हो सका।... याचिका में खजुराहो के... चंद्रवंशी राजाओं के इतिहास का भी वर्णन था, ...और सरकार से बार-बार अनुरोध के बावजूद कोई कार्रवाई न होने का आरोप लगाया गया।.... 13 जून को दायर इस याचिका पर हाल ही में सुनवाई हुई।... मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की बेंच ने... इसे 'पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन' की बजाय... 'पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन' करार दिया।... यानी, कोर्ट को लगा कि ये प्रचार के लिए दायर की गई है।.... CJI गवई ने तल्ख टिप्पणी की – ....'जाइए और अपने देवता से कहिए कि वे इस मामले में खुद कुछ करें।.... आप कहते हैं कि आप भगवान विष्णु के प्रबल भक्त हैं..., तो प्रार्थना कीजिए, ध्यान कीजिए।' ....कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि ये पुरातात्विक स्थल है, ...जो आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) के दायरे में आता है।... ASI की अनुमति के बिना कोई बदलाव संभव नहीं, ...और इसमें कई मुद्दे जुड़े हैं।.... इतना ही नहीं, CJI ने याचिकाकर्ता से कहा, '...अगर आप शैव धर्म के विरोधी नहीं हैं..., तो बगल में ही विशाल शिवलिंग है ...– खजुराहो के सबसे बड़े शिवलिंगों में से एक। ...वहां जाकर पूजा करिए।' ...कोर्ट ने याचिका पर विचार करने से इंकार कर दिया ...और इसे खारिज कर दिया। ...ये टिप्पणी अब विवादों में घिर गई है।... कई वकीलों और हिंदू संगठनों ने इसे धार्मिक भावनाओं का अपमान बताया है।... वकील विनीत जिंदल ने CJI को पत्र लिखकर ...टिप्पणियों को वापस लेने की मांग की।... एक अन्य वकील सत्यम सिंह राजपूत ने भी... ओपन लेटर लिखा।..वहीं सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है.... – कोई इसे कोर्ट की मजबूरी बता रहा है, ...तो कोई न्यायपालिका पर सवाल उठा रहा है।... लेकिन सवाल ये है – क्या पुरातात्विक संरक्षण और धार्मिक आस्था के बीच.... संतुलन कैसे बनेगा? खजुराहो जैसे स्थलों पर ऐसी मूर्तियां... इतिहास की गवाही देती हैं,..