केरल में ‘अदृश्य कातिल’ की दहशत
केरल... जिसे हम और आप 'God's Own Country' के नाम से जानते हैं...एक ऐसी जगह जो अपनी शांत झीलों,... हरे-भरे बैकवॉटर्स और दिलकश नज़ारों के लिए दुनिया भर में मशहूर है... लेकिन आज इसी जन्नत जैसी खूबसूरती के पीछे छिपे.... एक जानलेवा ख़तरे ने पूरे देश को चिंता में डाल दिया है... ये ख़तरा ऐसा है जो आंखों से दिखाई नहीं देता..., जिसकी कोई आवाज़ नहीं..., लेकिन जो चुपके से हमारे शरीर में दाखिल होकर सीधे दिमाग पर कब्ज़ा कर लेता है...ये कहानी है एक अदृश्य कातिल की, जिसने हाल ही में... एक हँसते-खेलते परिवार की दुनिया उजाड़ दी... केरल के कोझिकोड से आई एक खबर ने सबको झकझोर कर रख दिया है... एक 9 साल की बच्ची की 'ब्रेन-ईटिंग अमीबा' के इंफेक्शन से दर्दनाक मौत हो गई है...रिपोर्ट्स के मुताबिक, बच्ची को 13 अगस्त को तेज़ बुखार और सिरदर्द की शिकायत हुई...., जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया...जब उसकी हालत तेज़ी से बिगड़ने लगी, ...तो उसे 14 अगस्त को कोझिकोड मेडिकल कॉलेज में ...भर्ती कराया गया, लेकिन डॉक्टरों की पूरी कोशिश के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका...जब मेडिकल जांच हुई, तो जो सच सामने आया,.... जिसने सबके होश उड़ा दिए... उसकी मौत की वजह थी 'प्राइमरी अमीबिक मेनिंगो एन्से फलाइटिस'... एक दुर्लभ और जानलेवा दिमागी संक्रमण....ये कोई अकेली घटना नहीं है...इस बच्ची की मौत के अलावा, दो और मरीज़ भी गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं,.... जिनमें से एक की हालत इतनी नाज़ुक है... कि उसे वेंटिलेटर पर रखना पड़ा है... इन घटनाओं के बाद केरल के स्वास्थ्य विभाग ने पूरे राज्य में... अलर्ट जारी कर दिया है... और लोगों से बेहद सावधान रहने को कहा है... अब बात तकरते है अमीबा की जिसका वैज्ञानिक नाम है नेगलेरिया फाउलेरी ...यह गर्म, ताज़े पानी जैसे झील, नदी और तालाबों में पाया जाता है... ये गर्मी पसंद करने वाला जीव है,... .एक्सपर्ट्स बताते हैं कि यह 46 डिग्री सेल्सियस तक के गर्म तापमान में भी ज़िंदा रह सकता... इसलिए जब पानी का तापमान बढ़ता है,.... तो इसका ख़तरा भी बढ़
जाता है...... अब सवाल ये है कि पानी में रहने वाला एक छोटा सा जीव... आखिर हमारे दिमाग तक पहुँचता कैसे है?...इस अमीबा के हमले का तरीका जितना डरावना है..., उतना ही हैरान करने वाला भी... सबसे पहली और ज़रूरी बात..., यह बीमारी एक इंसान से दूसरे में नहीं फैलती.... आपको किसी संक्रमित व्यक्ति के पास बैठने या उसे छूने से कोई ख़तरा नहीं है.... इसका संक्रमण सिर्फ़ और सिर्फ़ एक ही रास्ते से होता है ...- जब नेगलेरिया फाउलेरी... वाला पानी आपकी नाक के ज़रिए शरीर में घुस जाए...जी हाँ, सिर्फ़ नाक के ज़रिए... अगर आप ऐसा पानी पी भी जाएं,... तो भी आप सुरक्षित हैं,.... क्योंकि हमारे पेट का एसिड इस अमीबा को खत्म कर देता है... ख़तरा तब होता है, जब आप किसी संक्रमित झील..., तालाब या नदी में तैरते हैं..., डुबकी लगाते हैं..., या किसी भी तरह से पानी को अपनी नाक में ज़ोर से खींच लेते हैं... ऐसा होते ही,... यह अमीबा नाक के रास्ते दिमाग तक जाने वाली नस तक पहुँच जाता है...एक बार वहाँ पहुँचने के बाद,... यह उस नस के सहारे सीधा आपके दिमाग़ में घुसपैठ कर लेता है...दिमाग़ में पहुँचते ही यह तबाही मचाना शुरू कर देता है....और यह मस्तिष्क के टिश्यू को खाने लगता है,... जिससे दिमाग़ में भयानक सूजन और इंफेक्शन हो जाता है, .......यह सब इतनी तेज़ी से होता है कि अक्सर डॉक्टरों और मरीज़ को संभलने का मौका तक नहीं मिल पाता...इसके शुरुआती लक्षण मामूली फ्लू जैसे होते हैं - तेज़ सिरदर्द, बुखार और उल्टी... लेकिन यह बीमारी बहुत तेज़ी से बढ़ती है...मरीज़ कन्फ्यूज़ होने लगता है, उसे दौरे पड़ सकते हैं और.... कुछ ही दिनों में उसकी मौत हो जाती है... इसीलिए इस बीमारी का डेथ रेट 97% से भी ज़्यादा है.....यह एक दुर्लभ लेकिन जानलेवा है, इसलिए....तालाब या झील जैसे रुके और गर्म पानी में नहाने से बचें....और अगर आपको किसी झील में नहाने के बाद तेज़ सिरदर्द और बुखार जैसे लक्षण दिखें...., तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं....अन्यथा ये आपकी जान भी ले सकता है