ऑक्सीजन का जिम्मेदार कौन?’ सिंगरौली केस में हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी
पैसे से ऑक्सीजन नहीं मिलती! पेड़ों की कटाई पर जबलपुर हाईकोर्ट का सख्त सवाल
‘ऑक्सीजन का जिम्मेदार कौन?’ सिंगरौली केस में हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी पैसे से सड़क बन सकती है…पैसे से इमारत खड़ी हो सकती है…लेकिन क्या पैसे से ऑक्सीजन खरीदी जा सकती है?....आज मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने ऐसा सवाल पूछा है...जिसने सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है….पेड़ों की कटाई पर जबलपुर हाईकोर्ट सख्त है…और सिंगरौली केस में कोर्ट की टिप्पणी हैं....ऑक्सीजन का जिम्मेदार कौन?...मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है...प्रदेश में पेड़ों की कटाई को लेकर....26 नवंबर को दिए गए अंतिम आदेश में कोई बदलाव नहीं होगा।...बुधवार को हुई सुनवाई में....चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा...और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने कहा....कटाई पर रोक के आदेश पहले ही दिए जा चुके हैं।....अगर उनका पालन नहीं हो रहा है,....तो कानून में जो विकल्प हैं, उसी के तहत कार्रवाई की जाए।....कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि....अब किसी तरह की ढील की गुंजाइश नहीं है।...कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि...पेड़ों की कटाई की अनुमति सिर्फ NGT की एक्सपर्ट कमेटी और.... ट्री ऑफिसर की सहमति से ही दी जा सकती है।.....अगर किसी को इस व्यवस्था से आपत्ति है, तो हाईकोर्ट नहीं…NGT का दरवाजा खटखटाना होगा।...कोर्ट ने अगली सुनवाई....14 जनवरी को तय की है...और राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।.... सुनवाई के दौरान...सिंगरौली के घिरौली कोल ब्लॉक में...करीब 6 लाख पेड़ों की कटाई का मामला भी उठा।….यह याचिका...बैढन जनपद पंचायत की अध्यक्ष...सविता सिंह ने दायर की है।...कंपनी की ओर से कहा गया....हर कटे पेड़ का मुआवजा दिया जाएगा।....लेकिन यहीं कोर्ट भड़क उठा।....चीफ जस्टिस की बेंच ने सख्त लहजे में पूछा....मुआवजे का पैसा तो सरकारी खजाने में चला जाएगा…लेकिन इन पेड़ों से मिलने वाली ऑक्सीजन का जिम्मेदार कौन होगा?”...यह सवाल सिर्फ कोर्ट का नहीं…हर उस नागरिक का है...जो सांस लेने के लिए...पेड़ों पर निर्भर है।...सरकार ने दलील दी कि—...काटे गए पेड़ों को...भोपाल के चंदनपुरा इलाके में...9.71 हेक्टेयर जमीन पर...ट्रांसलोकेट किया गया है।...लेकिन कोर्ट ने इस दावे को भी खारिज कर दिया।…बेंच ने कहा....जो किया गया है, उसे ट्रांसलोकेशन नहीं कहा जा सकता।”...यानी…कागज़ों में हरियाली,....हकीकत में बंजर ज़मीन।...आपको बता दें....इस पूरे मामले की शुरुआत…रायसेन जिले के भोजपुर रोड से हुई थी....जहां 448 पेड़ों की कटाई पर…हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया।…इसके बाद…भोपाल में विधायकों के आवास के लिए
244 पेड़,…और रेलवे प्रोजेक्ट में…करीब 8000 पेड़ों की कटाई..भी सामने आई।…इसी के बाद
20 नवंबर को भोपाल में…और 26 नवंबर को…पूरे मध्यप्रदेश में..पेड़ों की कटाई पर…सशर्त रोक लगा दी गई थी।…आज सवाल सिर्फ पेड़ों का नहीं है…सवाल हमारी सांसों का है।…क्या आप भी चाहते हैं…कि विकास के नाम पर….हरियाली का कत्ल न हो...तो COMMENT में अपनी राय जरूर लिखें
PUSHPANJALI PANDEY 