78 साल बाद बदला प्रधानमंत्री का दफ्तर
सत्ता का केंद्र... 78 सालों बाद बदल रहा है….रायसीना हिल्स पर मौजूद साउथ ब्लॉक…जो नेहरू से लेकर मोदी तक भारत का पावर सेंटर रहा…. अब इतिहास बनने जा रहा है…प्रधानमंत्री का दफ्तर,… यानी PMO, एक नए, हाई-टेक पते पर शिफ्ट हो रहा है….. यह सिर्फ एक ऑफिस का बदलना नहीं,… बल्कि भारत के काम करने के तरीके में एक नए दौर की शुरुआत है….. लेकिन इस बड़े बदलाव की ज़रूरत आखिर पड़ी क्यों?...इसकी वजह थी साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसी…. भव्य लेकिन पुरानी इमारतों की सीमाएं….. ये 21वीं सदी के भारत के लिए छोटी पड़ रही थीं….. सबसे बड़ी दिक्कतें थीं- जगह की भारी कमी…, लुटियंस दिल्ली में अलग-अलग इमारतों में बिखरे मंत्रालय,… और आज के डिजिटल दौर के हिसाब से पुरानी सुरक्षा और तकनीक….. इन चुनौतियों का समाधान है सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत बना…एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव… यही प्रधानमंत्री कार्यालय का नया पता होगा…एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव सिर्फ एक नया ऑफिस नहीं,… बल्कि एक इंटीग्रेटेड गवर्नेंस हब है….यहां प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), कैबिनेट सचिवालय और… राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद एक ही छत के नीचे काम करेंगे….. इसका सीधा मकसद मंत्रालयों के बीच की दूरी खत्म करना…, कम्युनिकेशन बेहतर बनाना और फैसले लेने की प्रक्रिया में ज़बरदस्त तेज़ी लाना है….. सुरक्षा के लिहाज़ से ये किसी किले से कम नहीं है… और… इसे मॉडर्न और सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी से बनाया गया है….. यह "विकसित भारत" के उस विज़न का हिस्सा है…., जहाँ प्रशासनिक मशीनरी भी दुनिया में सबसे आधुनिक हो….प्रधानमंत्री कार्यालय का यह शिफ्ट होना… "औपनिवेशिक अतीत से मुक्ति" का एक शक्तिशाली प्रतीक है…. अब भारत की सरकार उन इमारतों से नहीं,… बल्कि एक ऐसी इमारत से चलेगी जो… 'नए भारत' की पहचान को दर्शाती है….लेकिन सवाल ये उठता है की.... फिर ऐतिहासिक नॉर्थ और साउथ ब्लॉक का क्या होगा?... सरकार इन शानदार इमारतों को 'युगे युगीन भारत' नाम के एक भव्य म्यूज़ियम में बदलने जा रही है.... यह दुनिया के सबसे बड़े संग्रहालयों में से एक होगा,....जो भारत की हज़ारों साल पुरानी सभ्यता और... उपलब्धियों को दुनिया के सामने रखेगा...तो, 78 साल बाद PMO का यह कदम बेहतर तालमेल, ...तेज़ फैसलों और एक नए आत्मविश्वास का प्रतीक है.... इस ऐतिहासिक बदलाव पर आपके क्या विचार हैं? ...हमें कमेंट्स में ज़रूर बताएं.